बिहार में मतदाता सूची को लेकर चल रहे विशेष परीक्षण(SIR) को रोकने की मांग वाली एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई है। बिहार की बक्सर लोकसभा क्षेत्र से सांसद सुधाकर सिंह ने ये याचिका लगाई है। इससे पहले दाखिल हुई राजद, कांग्रेस समेत तमाम दलों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 28 जुलाई को सुनवाई करेगा।
क्या नया है इस याचिका में?
सांसद सुधाकर सिंह ने 24 जून को जारी चुनाव आयोग के SIR में आदेश को असंवैधानिक बताया कहा। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा है कि इस प्रक्रिया का कोई कानूनी आधार नहीं। यही नहीं इस प्रक्रिया से लाखों मतदाताओं के मतदान में अधिकार छीनने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने कहा था कि ये प्रक्रिया वोटर्स को नाम काटने की नहीं बल्कि जोड़ने की प्रक्रिया है।
'2003 की मतदाता सूची को आधार मानना भेदभावपूर्ण'
राजद सांसद ने चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण तरीके से और जल्दबाजी में कार्रवाई का आरोप लगाया है। इस पिटिशन के जरिए उन्होंने देश मतदाता सूची परीक्षण के लिए देश भर में एक समान नियम बनाए जाने की मांग की है। बिहार के योग्य मतदाताओं को कोई नुकसान न हो इसके लिए सुधारकर सिंह ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन तुरन्त रोके जाने की मांग की है।
राजद सांसद में SIR के खिलाफ दिए गए हैं ये आधार!
- एसआईआर प्रक्रिया मनमानी और असंवैधानिक है
- 6 महीने पहले बनी वोटर लिस्ट को नज़रअंदाज करना गलत
- 2003 की लिस्ट को आधार बनाना अन्याय
- सूची परीक्षण के दिया गया समय अपर्याप्त
- सिर्फ बिहार में SIR पक्षपातपूर्ण
याचिका में खड़े किए कई सवाल
इसके अलावा 4 लाख वॉलंटियर्स की दक्षता, ट्रेनिंग, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता, बाढ़ के समय इस प्रक्रिया को कराए जाने जैसे कई मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट से इस याचिका में सवाल खड़े किए गए हैं।
