वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फैसले पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'हमने आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। हमने उन मामलों में मृत्युदंड सुनिश्चित किया है, जहां राज्य ने मुकदमा चलाया, मामला हमसे छीनकर सीबीआई को दे दिया गया था'
गौर हो कि सियालदह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास की अदालत ने शनिवार को रॉय को पिछले वर्ष नौ अगस्त को अस्पताल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक के खिलाफ हुए जघन्य अपराध के मामले में दोषी ठहराया था। इस घटना के बाद पूरे देश में अभूतपूर्व और लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए थे।
न्यायाधीश दास ने कहा कि यह अपराध 'दुर्लभ से दुर्लभतम' श्रेणी में नहीं आता, जिससे दोषी को मृत्युदंड दिया जा सके।अदालत ने राज्य सरकार को मृतक चिकित्सक के परिवार को 17 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।न्यायाधीश ने दोषी करार देने के अंतिम फैसले और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों के साथ-साथ पीड़िता के परिवार और मामले की जांच कर रही CBI की अंतिम जिरह सुनने के बाद सजा का ऐलान किया।
घटना से पूर्व रॉय कोलकाता पुलिस के साथ नागरिक स्वयंसेवक के रूप में काम कर रहा था। रॉय को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (बलात्कार), 66 (मृत्यु का कारण बनने की सजा) और 103 (1) (हत्या) के तहत दोषी ठहराया गया।
