Shiv Sena Dussehra Rally : शिवसेना की स्थापना के 56 साल बाद पहली बार मुंबई में दशहरा के मौके पर दो दशहरा रैलियां आयोजित की गई। शिवसेना दो धडों में बंट गई है। एक उद्धव ठाकरे का गुट है तो दूसरा एकनाथ शिंदे का गुट है। दोनों ने दशहरे के मौके पर खुद को असली शिवसेना बताने के लिए जमकर शक्ति परीक्षण किया। शिवाजी पार्क में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की रैली हुई जबकि एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट की बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में हुई। ठाकरे और एकनाथ शिंदे के क्रमश: शिवाजी पार्क और बीकेसी मैदान में अलग-अलग रैली को संबोधित किया। दोनों खेमों ने दावा किया कि वे दिवंगत बाल ठाकरे के आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं। बाल ठाकरे शिवाजी पार्क में दशहरा रैलियों में उग्र भाषण देने के लिए पहचाने जाते थे। 2012 में उनके निधन के बाद से उनके बेटे उद्धव ठाकरे इस वार्षिक रैली को संबोधित करते आए हैं।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट के नेता बीकेसी मैदान में शिवसेना दशहरा रैली में शामिल हुए। बालासाहेब ठाकरे के बेटे जयदेव ठाकरे महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे के साथ मंच शेयर किया और उनक समर्थन किया। शिवसेना के शिंदे गुट के नेता रामदास कदम ने कहा कि आपके भाई, चचेरे भाई भी आपके साथ नहीं हैं उद्धव जी, अगर आप अपने परिवार को भी बरकरार नहीं रख सकते हैं, तो आप राज्य को कैसे बरकरार रखेंगे?
एकनाथ शिंदे के दावे
शिंदे ने कहा कि मेरे कई समर्थक कल शाम आए थे। मैं आपकी तरह ही एक कार्यकर्ता हूं। यह भारी भीड़ हमारे योगदान के लिए धन्यवाद है। यह है कार्यकर्ताओं का महासागर, इस सवाल पर कि असली शिवसेना कौन है, भीड़ देखिए, इस सवाल पर कि कौन है बालसाहेब का वारिस, भीड़ को देखिए। रिमोट कंट्रोल बालासाहेब के हाथ में था लेकिन आपने (उद्धव) ने एनसीपी को दे दिया। हमने महाराष्ट्र के हिंदुत्व को बचाने के लिए यह भूमिका निभाई। इसलिए हमें यह प्यार और समर्थन मिल रहा है, अगर हम देशद्रोही होते, तो हमें यह समर्थन नहीं मिलता, हमने यह सेना और देश के लिए किया। यह शिंदे या उद्धव की शिवसेना नहीं, बलसाहेब की विचारधारा की है। आपको हमें गद्दार और खोके बुलाए हुए दो महीने हो चुके हैं। इससे आगे बढ़ें। आप गद्दार थे। आपने कांग्रेस और एनसपी के साथ गठबंधन किया। आपने बालासाहेब की विचारधारा के साथ विश्वासघात किया है। गद्दारी है। जब आपने ऐसा किया तो आपने लोगों के जनादेश के साथ धोखा किया।शिंदे ने कहा कि हमने गदर नहीं की, हमने गदर (क्रांति) की। आपने जो पाप किया है, उसके लिए बालासाहेब की समाधि पर झुककर क्षमा मांगें। हमने उद्धव से कहा कि हमें कांग्रेस और एनसीपी द्वारा दरकिनार किया जा रहा है। जब हमने उसे नोटिस दिया, तो उन्होंने कहा कि हमने उन्हें चुना है, आप ऐसा कैसे महसूस कर सकते हैं? आप उस मुख्यमंत्री पद को पाकर बस खुश थे। सेना का झंडा और एनसीपी का एजेंडा आपकी सरकार थी। सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह आपकी (उद्धव ठाकरे) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है। शिवसेना उन शिवसैनिकों की है, जिन्होंने इसके लिए अपना पसीना बहाया है। आप जैसे लोगों के लिए नहीं, जिन्होंने पार्टनरशिप की और उसे बेच दिया। वे मुझे 'कटप्पा' कहते हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं, कि 'कटप्पा' में भी स्वाभिमान था, आप जैसा दोहरा मापदंड नहीं था।
उद्धव ठाकरे के दावे
उद्धव ठाकरे ने लोगों को दशहरा की बधाई दी और कहा कि ये नकली भीड़ नहीं है, ये शिवसैनिक हैं। रैली मैं मौजूद एक भी व्यक्ति बिकाऊ नहीं है। ये ठाकरे परिवार की कमाई है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने मेरी पीठ में छुरा घोंपा और उसे सबक सिखाने के लिए मैंने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन किया। शिंदे गुट के लोग धोखेबाज हैं। हम धोखेबाजों को धोखेबाज ही कहेंगे। उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा को गरीबी जैसे मुद्दे पर आईना दिखाने के लिए आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हर साल की तरह रावण दहन होगा लेकिन इस बार हमारे पास अलग रावण है। रावण के 10 सिर हैं। लेकिन इस रावण (शिंदे) के पास 50 हैं। वह 50 गुना अधिक विश्वासघात कर रहे हैं। मुझे केवल एक ही बात बुरी लगती है और गुस्सा आता है कि जब मुझे अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो जिन लोगों को मैंने राज्य की जिम्मेदारी दी, वे कटप्पा बन गए और हमें धोखा दिया। वे मुझे काट रहे थे और सोच रहे थे कि मैं अस्पताल से कभी नहीं लौटूंगा।उद्धव ठाकरे ने कहा कि मुझे आज भी दशहरा मेला पहले से याद हैं। लेकिन यह उल्लासपूर्ण है। मैं बाध्य महसूस करता हूं। आप इस वास्तविक भीड़ को नहीं खरीद सकते। ये मेरे वफादार शिवसैनिक यहां जमा हो रहे हैं। मैंने इसी शिवाजी पार्क में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। डॉक्टरों ने मुझे अभी भी झुकने के लिए नहीं कहा है लेकिन मैं आपके सामने झुकने से नहीं बच सकता। जब इन शिवसैनिकों ने विद्रोह कर दिया। हां, वे गद्दार हैं। वे गद्दार ही रहेंगे। यह अब उनके चेहरे पर एक धब्बा है। यहां एकनिष्ठ, वफादार लोग हैं।
गौर हो कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के कुछ विधायकों के जून में बगावत करने के बाद महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे नीत महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई थी, तभी से शिवसेना दो धड़ों में बंटी हुई है। सूत्रों ने बताया कि 5000 से अधिक बसें, कई छोटे पर्यटक वाहन, कार और एक विशेष ट्रेन दोनों प्रतिद्वंद्वी शिवसेना गुटों के समर्थकों को उनकी दशहरा रैलियों में ले जाने के लिए लगाई गई।
