Uttarakhand Tunnel: उत्तराखंड सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए अब एक साथ दो योजनाओं पर काम चल रहा है। एक तरफ मैन्यूअल ड्रिलिंग तो दूसरी ओर वर्टिकल ड्रिलिंग। मैन्यूअल ड्रिलिंग के लिए रैट माइनर्स की एक टीम हादसे वाली जगह पर पहुंच गई है। जहां से वो जल्द से जल्द टनल की खुदाई में जुट जाएगी।
जल्द शुरू होगी हाथ से खुदाई
उत्तरकाशी में सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के लिए हाथ से खुदाई जल्द शुरू की जाएगी। ऑगर मशीन के खराब हो जाने के बाद अब हाथ से खुदाई की जाएगी। ऑगर मशीन से 46.8 मीटर तक खुदाई की जा चुकी थी लेकिन उसके बाद इस मशीन के टूट जाने के कारण उससे और खुदाई नहीं की जा सकी। जिसके बाद अब रैट माइनर्स हाथ से खुदाई की जिम्मेदारी संभालेंगे।
सेना करेगी मदद
ऑगर ड्रिलिंग मशीन के खराब होने के बाद कई सरकारी एजेंसियों के अलावा, भारतीय सेना भी सुरंग में मैन्युअल रूप से ड्रिलिंग शुरू करने के लिए बचाव अभियान में शामिल हो गई। टूटी मशीन को अब सुरंग से हटा दिया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा- "ऑगर ब्लेड बाहर आ गए हैं, 1.5 मीटर क्षतिग्रस्त पाइप को हटाया जा रहा है। मग क्लीयरेंस के बाद कुशल मजदूरों द्वारा और सेना की मदद से मैनुअल ड्रिलिंग शुरू की जाएगी। यह सबसे तेज तरीका होगा। कुशल मजदूर प्लाज्मा या पारंपरिक तरीके से मैन्युअल ड्रिलिंग करेंगे।"
है बड़ा खतरा
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने उत्तरकाशी में येलो अलर्ट जारी किया है। जिसमें बारिश, बिजली गिरने और संभावित ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है, जिससे चल रहे बचाव कार्यों पर असर पड़ सकता है।
वर्टिकल ड्रिलिंग भी जारी
एक तरफ मैन्यूअल ड्रिलिंग की तैयारी है तो दूसरी ओर वर्टिकल ड्रिलिंग भी जारी है। सुरंग के ऊपर से भी खुदाई जारी है। जो अबतक 30 मीटर तक पहुंच चुका है। कुल 86 मीटर ड्रिलिंग की जानी है।
