Ram Mandir Donation Theft: सुप्रीम कोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति व्यक्त की है। यह याचिका राम मंदिर दान/चंदा चोरी और मंदिर के आसपास की जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े आरोपों के संबंध में दाखिल की गई है। यह याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा नामक संगठन द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चंपत राय भी फंड के दुरुपयोग और मंदिर के आसपास की जमीनों की अवैध खरीद में शामिल थे।
संपत्ति जब्ती की मांग
महासभा ने सर्वोच्च अदालत से उत्तर प्रदेश सरकार और अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की है कि ट्रस्टी या उनके सहयोगियों के कब्जे वाली सभी चल और अचल संपत्तियों को कुर्क किया जाए। याचिका में मौजूदा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पूरी तरह से भंग कर उसके पुनर्गठन की मांग की गई है। महासभा का कहना है कि चंदा चोरी घोटाला सामने आने के बाद ट्रस्ट में केवल नेतृत्व और प्रशासनिक स्तर पर ही कुछ बदलाव किए गए थे, जो पर्याप्त नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
जब यह मामला मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने आया, तो पीठ ने हिंदू महासभा के वकील वरिंदर कुमार शर्मा को आश्वासन दिया। इस याचिका को राम मंदिर चंदा चोरी से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ टैग किया जाएगा। कोर्ट इन सभी याचिकाओं पर एक साथ 2 नवंबर को सुनवाई करेगा।
यूपी SIT की जांच और चंपत राय की भूमिका
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश राज्य SIT ने इस चंदा चोरी मामले की विस्तृत जांच के बाद चंपत राय को क्लीन चिट दे दी है। एसआईटी द्वारा दाखिल आरोप पत्र में चंपत राय का नाम मुख्य अभियोजन गवाह के रूप में शामिल है। चंपत राय ने जांचकर्ताओं को बताया था कि उन्हें यात्रा के दौरान फोन कॉल और वीडियो संदेश के जरिए सबसे पहले गड़बड़ी की जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की और औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराने का सुझाव दिया। एसआईटी की चार्जशीट में केवल 8 गिरफ्तार काउंटिंग एजेंटों और कर्मचारियों को आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार के अपराधों के लिए आरोपी बनाया गया है।
