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Tirupati Controversy: राम मंदिर तक पहुंचा तिरुपति लड्डू विवाद, जांच के लिए भेजे गए इलायची दाने के सैंपल

Ram Mandir Prasad: अयोध्या के राम मंदिर में प्रतिदिन इलायची दाने के 80,000 पैकेट वितरित किए जाते हैं। इस प्रसाद को लेकर आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की गई थी। इसके बाद हैदरगंज में उस स्थान से नमूने खरीदे गए जहां राम मंदिर के लिए इलायची दाने का प्रसाद तैयार किया जाता है।

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जांच के लिए भेजा गया राम मंदिर के प्रसाद का सैंपल ।

Photo : Twitter

Ram Mandir Prasad: तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डुओं से शुरू हुआ विवाद अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर तक पहुंच गया है। खबर है कि राम मंदिर के प्रसाद की जांच के लिए सैंपल लिए गए हैं और उन्हें लैब भेजा गया है। सहायक खाद्य आयुक्त ने बताया कि प्रसाद के रूप में वितरित किए जा रहे इलायची दाने के नमूने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एकत्र किए हैं और उन्हें जांच के लिए झांसी की एक सरकारी प्रयोगशाला में भेजा है।

बता दें, बीते दिनों तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डुओं में जानवरों की चर्बी वाले घी के इस्तेमाल की खबरें सामने आई थीं। इनके नमूनों को जब जांच के लिए भेजा गया तो इसकी पुष्टि भी हुई, जिसके बाद मामला और बढ़ गया और इस पर सियासत भी तेज हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

हर दिन प्रसाद में बंटते हैं इलायची दाने के 80 हजार पैकेट

राम मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने बताया कि औसतन, प्रतिदिन पवित्र प्रसाद के रूप में इलायची दाने के 80,000 पैकेट वितरित किए जाते हैं। सहायक खाद्य आयुक्त मानिक चंद सिंह ने कहा कि एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) के माध्यम से दर्ज की गई शिकायत के बाद हैदरगंज में उस स्थान से नमूने खरीदे गए जहां इलायची दाने का प्रसाद तैयार किया जाता है। इन नमूनों को व्यापक परीक्षण और मूल्यांकन के लिए झांसी राज्य प्रयोगशाला भेजा गया है।

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में बंटे थे तिरुपति की लड्डू

तिरुपति मंदिर विवाद सामने आने के बाद अयोध्या के राम मंदिर के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने लडुड्ओं में पशु चर्बी वाले घी का इस्तेमाल होने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। सत्येंद्र दास ने कहा कि इसी साल जनवरी में राम मंदिर के अभिषेक समारोह के दौरान तिरुपति मंदिर से 300 किलोग्राम प्रसाद भक्तों में वितरित किया गया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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