राज्यसभा में 'वंदे मातरम' पर होगी चर्चा (फोटो साभार: @sansad_tv)
Parliament Session: राज्यसभा में अगले सप्ताह राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की रचना की 150वीं वर्षगांठ और चुनाव सुधारों पर चर्चा होगी। सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह फैसला राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक में किया गया, जिसकी अध्यक्षता उच्च सदन के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने की। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भाग लिया। दोनों विषयों पर चर्चा 10-10 घंटे की होगी।
सूत्रों ने बताया कि बीएसी की बैठक में फैसला किया गया कि 'वंदे मातरम' पर चर्चा मंगलवार को होगी, जबकि चुनाव सुधारों पर चर्चा बुधवार या बृहस्पतिवार को होगी, जब लोकसभा में इस विषय पर चर्चा पूरी हो जाएगी। लोकसभा में, वंदे मातरम की रचना के 150 साल पूरा होने के विषय पर सोमवार को तथा चुनावों सुधारों के मुद्दे पर मंगलवार एवं बुधवार को चर्चा होगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में सोमवार आठ दिसंबर को 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर और मंगलवार नौ दिसंबर को चुनाव सुधारों पर चर्चा होगी।
राज्यसभा में बुधवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने मणिपुर में विधानसभा चुनाव यथाशीघ्र कराने और निर्वाचित सरकार के गठन की मांग की। विपक्ष के सदस्यों ने यह मांग मणिपुर से संबंधित एक संकल्प पर चर्चा के दौरान की। यह संकल्प जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को मणिपुर में भी लागू किए जाने से संबंधित है। मणिपुर में इस समय राष्ट्रपति शासन है।
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वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने उच्च सदन में यह प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण दोनों सदनों को केंद्रीय कानून पर संकल्प पारित करने की जरूरत है। संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सदस्य सुष्मिता देव ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन जारी रहने की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘हम आज जो कर रहे हैं, वह मणिपुर की विधानसभा को करना था। हमें यह क्यों करना पड़ रहा है? क्योंकि मणिपुर राज्य में निलंबित विधानसभा है, वहां राष्ट्रपति शासन है। 2024 के इस संशोधन का क्या मकसद है? वे व्यापार और जीवन में सुगमता की बात करते हैं। इनमें से कौन सी चीज आज मणिपुर में है, और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है?’’
कांग्रेस सदस्य नीरज डांगी ने कहा कि यह संकल्प संसद में पेश करना पड़ा, क्योंकि मणिपुर में हालात सुधरे नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मणिपुर में कानून व्यवस्था पूरी तरह से खत्म हो गयी है, यह मुख्यमंत्री के नियंत्रण से बाहर हो गया, केंद्र ने इस पर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी वहां गए और लोगों से मिले। प्रधानमंत्री को वहां जाना चाहिए था, लेकिन दो साल से अधिक समय तक वह मणिपुर नहीं गए।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘हाल ही में, सितंबर 2025 में वह (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी) मणिपुर गए... वह वहां वोट के लिए गए।’’
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