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सीमा विवाद से बचने, बेहतर रश्ते के लिए राजनाथ ने चीन को सुझाए 4 प्लान, मानसरोवर यात्रा की शुरुआत पर खुशी जताई

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य गतिरोध समाप्त करने के लिए पिछले साल अक्टूबर में सहमति बनी थी, जिसके बाद नयी दिल्ली और बीजिंग के संबंधों को फिर से स्थापित करने के प्रयासों के बीच भारतीय रक्षा मंत्री की यह चीन यात्रा हुई है।

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अपने चीनी समकक्ष को मधुबनी पेंटिंग भेंट करते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह।

Photo : ANI

Rajnath Singh meets Admiral Dong Jun : सीमा विवाद का हल और द्विपक्षीय रिश्ते बेहतर बनाने के लए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के समक्ष चार सूत्री योजना पेश की है। बंदरगाह शहर चिंगदाओ में अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डॉन जुन के साथ हुई बैठक में रक्षा मंत्री ने ये सुझाव दिए। चिंगदाओ में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं की बैठक हुई। बैठक के बाद राजनाथ ने जुन को बिहार के मधुबनी की पेंटिंग भेंट की।

बेहतर रिश्ते के लिए सुझाए 4 प्लान

रिपोर्टों के मुताबिक ये चार सूत्री फॉर्मूले में 2024 में दोनों देशों की सेना के बीच गतिरोध वाले स्थानों से पीछे हटना, तनाव कम करने के प्रयासों को जारी रखना, सीमा पर सीमांकन और परिसीमन के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयासों में तेजी लाना, मतभेदों को दूर करने और रिश्ते सुधारने के लिए पहले से मौजूद विशेष प्रतिनिधि स्तर की मौजूदा प्रणाली का इस्तेमाल करना शामिल है। साथ ही सिंह ने जुन से कहा है कि भारत और चीन को द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति बनाए रखनी चाहिए और नयी जटिलताओं से बचना चाहिए।

एससीओ रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन से इतर हुई मुलाकात

सिंह ने बृहस्पतिवार शाम को चीन के बंदरगाह शहर चिंगदाओ में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन से इतर जुन के साथ "सार्थक" वार्ता की। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैन्य गतिरोध समाप्त करने के लिए पिछले साल अक्टूबर में सहमति बनी थी, जिसके बाद नयी दिल्ली और बीजिंग के संबंधों को फिर से स्थापित करने के प्रयासों के बीच भारतीय रक्षा मंत्री की यह चीन यात्रा हुई है। सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "चिंगदाओ में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डॉन जून के साथ बातचीत की। हमने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक वार्ता की।’’

मानसरोवर यात्रा शुरू होने पर खुशी जताई

उन्होंने कहा, "लगभग छह वर्ष के अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पुनः आरंभ होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।" सिंह ने कहा, "दोनों पक्षों के लिए यह आवश्यक है कि वे इस सकारात्मक गति को बनाए रखें और द्विपक्षीय संबंधों में नयी जटिलताओं से बचें।" अधिकारियों ने बताया कि सिंह ने डॉन को एक मधुबनी पेंटिंग ‘ट्री ऑफ लाइफ’ भी भेंट की। चीन की ओर से जारी बयान के अनुसार, सिंह ने डॉन के साथ बैठक में कहा कि भारत चीन के साथ संघर्ष या टकराव नहीं चाहता, तथा वह मतभेदों को उचित ढंग से निपटाने, संवाद बढ़ाने एवं द्विपक्षीय संबंधों के सतत विकास के लिए आपसी विश्वास को बढ़ावा देने का इच्छुक है। तिब्बत में कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली के बीच सिंह की चिंगदाओ यात्रा हुई है।

गलवान झड़प के बाद रिश्ते पटरी से उतरे

कैलाश मानसरोवर यात्रा को शुरू में 2020 में कोविड-19 महामारी और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिरोध के कारण निलंबित कर दिया गया था। चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा हिंदुओं के साथ-साथ जैन और बौद्धों के लिए भी धार्मिक महत्व रखती है। पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध मई 2020 में शुरू हुआ और उस वर्ष जून में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के परिणामस्वरूप दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए। पिछले वर्ष 21 अक्टूबर को हुए समझौते के तहत डेमचोक और देपसांग के अंतिम दो टकराव बिंदुओं से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गतिरोध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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