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'ऑटोवालों में इतनी हिम्मत कहां से आती है कि...', राज ठाकरे ने मराठी भाषा विवाद को फिर दी हवा, क्यों किया सचिन तेंदुलकर का जिक्र?

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर एक बार फिर जोरदार बयान दिया। उन्होंने लोगों से मराठी के प्रति “दृढ़” रहने और एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि मराठी सिर्फ भाषा नहीं बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठी भाषियों को एकजुट होने से रोकने के लिए जानबूझकर प्रयास किए गए हैं।

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राज ठाकरे ने फिर मराठी भाषा को लेकर की तीखी टिप्पणी।

Photo : PTI

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने गुरुवार को एक बार फिर भाषा के मुद्दे को लेकर बड़ा बयान दिया है। गुरुवार को महाराष्ट्र के लोगों से मराठी भाषा के प्रति अधिक 'मुखर' होने का आग्रह किया और आरोप लगाया कि मराठी भाषी लोगों को एकजुट होने से रोकने के जानबूझकर प्रयास किए गए हैं।

'मराठी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं'

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ताकतें जानबूझकर समाज को बांटने की कोशिश कर रही हैं, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने दिया जाएगा। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि मराठी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान है, जिसे बनाए रखना जरूरी है।

पुणे में वसंत व्याख्यानमाला द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ठाकरे ने कहा कि मराठी को "अभिजात" (शास्त्रीय) भाषा का दर्जा दिए जाने के बावजूद, हिंदी को लेकर बहस जारी है।

मराठी भाषी लोगों को एकजुट होने से रोक गया: राज ठाकरे

उन्होंने टिप्पणी की कि मराठी भाषी लोग अक्सर "अनजान और भयभीत" होते हैं। राज ठाकरे ने कहा कि जब सचिन तेंदुलकर वानखेड़े स्टेडियम में मराठी में भाषण देते हैं तो उन्हें गर्व महसूस होता है, लेकिन उन्होंने लेखकों और कलाकारों को जाति के आधार पर आंकने के लिए समाज की आलोचना की। उन्होंने दावा किया, "मराठी भाषी लोगों को एकजुट होने से रोकने का जानबूझकर प्रयास किया गया है।"

ऑटो रिक्शा ड्राइवर को लेकर राज ठाकरे ने क्या कहा?

एमएनएस प्रमुख ने राज्य की बिगड़ती स्थिति के लिए राजनीतिक नेताओं और सरकार को जिम्मेदार ठहराया। भाषा संबंधी प्रथाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि ऑटो रिक्शा ड्राइवर मराठी बोलने से इनकार करने का साहस कैसे जुटाते हैं। क्या तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल या गुजरात जैसे राज्यों में ऐसा व्यवहार देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, "हमारे मंत्री ऐसे रिक्शा चालकों के लाइसेंस रद्द करने के बजाय उन्हें मराठी सीखने के लिए चार महीने से अधिक का समय देते हैं।"

इससे पहले 27 अप्रैल को महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विभिन्न रिक्शा और टैक्सी चालक संघों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक बुलाई थी, जिनमें श्रम नेता संजय निरुपम और शशांक शरद राव भी शामिल थे। इस बैठक में राज्य के सभी वाणिज्यिक यात्री वाहन चालकों के लिए "व्यावहारिक मराठी" को अनिवार्य बनाने के पर चर्चा की गई।

दुकान के साइनबोर्ड का भी किया जिक्र

राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की कई दुकानों में खासकर मुंबई और पुणे के कुछ इलाकों में, गैर-मराठी भाषा में लिखे साइनबोर्ड के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, "यह देखा गया है कि कई जगहों पर दुकानों के बाहर गुजराती भाषा के साइनबोर्ड लगाए गए हैं। मैं किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहा; हर भाषा अपने राज्य की होती है, लेकिन हमारे राज्य में मराठी भाषा का प्रयोग होना चाहिए। फिर जब हमारे लोग इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई करते हैं, तो हमारे ही लोग कहते हैं कि हिंसा (मारपीट) नहीं होनी चाहिए थी। अगर ऐसा नहीं, तो फिर क्या किया जाए? क्या हम उनकी आरती करें? बताइए, इसका क्या जवाब होना चाहिए? सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनमें ऐसे साइनबोर्ड लगाने की हिम्मत भी है।"

सांस्कृतिक गौरव पर जोर देते हुए राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्रवासियों को छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले और बीआर अंबेडकर के स्मारकों को गर्व से प्रदर्शित करना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि ऐसे नेताओं को जातिगत आधार पर विभाजित कर दिया गया है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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