राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat jodo yatra)धीरे धीरे समापन की तरफ बढ़ रही है। इन दिनों उनकी यात्रा दिल्ली में है और उन्होंने एक तस्वीर अपवे ट्विटर हैंडल से जारी की जिसमें वो अपनी मां सोनिया गांधी के साथ हैं और लिखा कि जो मोहब्बत इनसे मिली है देश को बांट रहा हूं। इससे पहले राहुल गांधी की एक और तस्वीर सामने आई थी जिसमें वो पदयात्रा के दौरान सोनिया गांधी के जूते की फीते को बांधते नजर आए। इसके अलावा भी उनकी बहुत सी ऐसी तस्वीरें आईं जो सुर्खियों में छाईं रहीं। अब जब उनकी यात्रा जम्मू कश्मीर की तरफ बढ़ रही है तो उसके सियासी मायने क्या हैं उसे समझने की कोशिश करेंगे।
क्या बीजेपी को संदेश
दो लाइन का यह कैप्शन क्या बीजेपी को संदेश है। इस संबंध में जानकारों की राय अलग अलग है। कुछ जानकार कहते हैं कि अगर आप भारत जोड़ो यात्रा के अब तक के क्रम को देखें तो राहुल गांधी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस का मतलब जिस रूप में बीजेपी समझाने की कोशिश करती रही है उससे अलग है। कांग्रेस कभी कुर्सी से चिपक कर राजनीति करने में भरोसा नहीं करती है। कांग्रेस पार्टी में सत्ता में रहकर आम जन की सेवा करने की माद्दा है तो सड़क पर रहकर लोगों की लड़ाई लड़ने की ताकत भी है। यह बात सच है कि राजनीतिक दलों के लिए सत्ता की प्राप्ति ही मुख्य लक्ष्य होता है। लेकिन सत्ता हासिल करने के लिए लड़ी जाने वाली लड़ाई सड़कों पर ही लड़ी जाती है।
2024 में आम चुनाव
2024 में आम चुनाव में अभी एक साल से अधिक का वक्त है। कांग्रेस के रणनीतिकारों को लगता है कि आम चुनाव में फतह हासिल करने के लिए जनता के मुद्दों को प्रखर तौर पर रखने के साथ साथ कार्यकर्ताओं में जोश भरना जरूरी है। अगर राज्यों की बात करें तो कांग्रेस शासित प्रदेशों की गिनती उंगली पर की जा सकती है। ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि बूथ लेवल की लड़ाई लड़ने के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरा जाए। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी के जितने रंग दिखाई दिए हैं वो उनमें से एक हैं। कांग्रेस को पता है कि उनके सामने जो राजनीतिक शख्सियत है उसे अपार जनसमर्थन हासिल है, लिहाजा सड़क पर उतर कर ही लोगों को समझाने के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा सकता है।
