पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान कल यानी सोमवार 3 मार्च को जाओ करते रहो धरना कहकर किसानों के साथ हुए बैठक को छोड़कर चले गए थे। लेकिन अब उनकी पुलिस ने धरना प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पंजाब पुलिस ने कई किसान संगठनों के नेताओं के घरों पर छापेमारी की है। कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया है। इस बीच किसानों की तरफ से राज्य में कई जगहों पर पुलिस का विरोध किया जा रहा है।
अपनी मांगों को लेकर पंजाब के किसान 5 मार्च को चंडीगढ़ घेराव करके आंदोलन करने जा रहे हैं। इसी आंदोलन के संबंध में संयुक्त किसान मार्चो-राजनीतिक के 40 नेताओं और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच सोमवार शाम चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में बैठक हुई। इसी दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान गुस्सा हो गए और किसानों से यह कहते हुए बैठक से उठकर चले गए कि 'जाओ करते रहो धरना।'
पंजाब पुलिस ने चंडीगढ़ कूच से पहले ही बठिंडा जिले में करीब एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की है। इस दौरान पुलिस ने कई किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया है।
'पहली बार देखा किसी मुख्यमंत्री को ऐसा करते'
इधर किसान नेताओं का कहना है कि बैठक में चर्चा अच्छे से चल रही थी, लेकिन कुछ मांगों को लेकर आपस में बहस हो गई। इस बीच मुख्यमंत्री ने उनकी बेइज्जती की और कहा, 'जाओ करते रहो धरना।' ऐसा कहकर भगवंत मान बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए। किसान नेताओं का कहना है कि किसी मुख्यमंत्री को ऐसा करते हुए पहली बार देखा है।
किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बैठक बेनतीजा रहने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री भगवंत मान अचानक गुस्सा हो गए और मीटिंग छोड़कर चले गए। जाते-जाते वह किसानों को कह गए कि 5 तारीख को जो करना है कर लो, लगा लो धरना। बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, किसान संघर्षों के दौरान उन्होंने कई बार प्रधानमंत्रियों और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की, लेकिन ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा।
किसान आंदोलन पर क्या बोले भगवंत मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि किसानों से बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले हैं। लेकिन उन्हें आंदोलन के नाम पर आम लोगों को परेशान करने से बचना चाहिए। किसानों के साथ चंडीगढ़ के पंजाब भवन में बैठक के दौरान उन्होंने कहा, सरकार समाज के हर वर्ग से संबंधित मुद्दों को बातचीत के जरिए हल करने के लिए हमेशा तैयार है। रेलों और सड़कों को रोकने से आम लोगों को होने वाली परेशानी से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा, ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए, जिससे आम लोगों को दिक्कत होती और लोग आंदोलनकारियों के खिलाफ हो जाते हैं, इससे समाज में फूट पड़ती है। विरोध प्रदर्शनों के कारण आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है, जो पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना किसानों का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि इससे राज्य को नुकसान हो रहा है। व्यापारी और उद्योगपति इससे परेशान हैं, इससे उनका व्यवसाय तबाह हो रहा है।
