प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परमाणु क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि स्पेस सेक्टर में कई निजी कंपनियों ने इनोवेशन को अपनाकर बड़ा कमाल दिखाया है और पूरा विश्व उसका लोहा भी मान रहा है।
स्काईरूट कंपनी की इन्फिनिटी कैंपस के उद्घाटन के मौके पर संबोधित करते हुए कहा, प्राइवेट सेक्टर ने ही आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्काईरूट जैसी कंपनियों को जन्म दिया है। स्काईरूट ने ही 2022 में विक्रम एस को प्रक्षेपित किया था।
क्या है परमाणु ऊर्जा विधेयक-2025?
जानकारी के मुताबिक, सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025 लाने की तैयारी कर रही है। यह बिल प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की इजाजत देगा।
बता दें कि इस समय देश में जितने भी न्यूक्लियर पावर प्लांट हैं, वे सरकारी कंपनी के नियंत्रण में हैं. मुख्य जवाबदेही एनपीसीएल की है। अगर सरकार नए नियम लागू करती है, तो निजी कंपनियों को भी न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन के लिए बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी।
न्यूक्लियर प्रोड्यूस करने के मामले में अमेरिका नंबर-1
अमेरिका दुनिया में सबसे अधिक परमाणु ऊर्जा पैदा करने वाला, यानी न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन वाला, देश है और वैश्विक न्यूक्लियर पावर उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 30% है। वहां लगभग 80% परमाणु ऊर्जा का उत्पादन निजी कंपनियों द्वारा किया जाता है।
चीन 16% वैश्विक हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है, लेकिन वहां पूरा न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र पूरी तरह सरकारी कंपनियों के नियंत्रण में चलता है।
फ्रांस 14% हिस्सेदारी के साथ तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जहां अधिकांश परमाणु ऊर्जा का संचालन सरकारी कंपनी EDF करती है। रूस 8% के ग्लोबल शेयर के साथ चौथे स्थान पर आता है, और इसका पूरा उत्पाद सरकारी कंपनी Rosatom द्वारा संचालित होता है। पांचवें नंबर पर दक्षिण कोरिया है, जिसका वैश्विक हिस्सा 7% है, और यहां भी न्यूक्लियर ऊर्जा का संपूर्ण उत्पादन सरकारी कंपनी KHNP के हाथों में है।
