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'प्रधानमंत्री ने बोर कर दिया, मुझे मैथ के डबल पीरियड की याद आ गई...' संसद में पीएम मोदी के भाषण पर बोलीं प्रियंका गांधी

Priyanka Gandhi on PM Modi Speech: प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मेरे लिए यह नया अहसास था, मैंने सोचा था कि प्रधानमंत्री जी कुछ नया बोलेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने पूरी तरह बोर कर दिया। मुझे दशकों बाद स्कूल में मैथ के डबल पीरियड की याद आ गई।

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पीएम मोदी-प्रियंका गांधी

Priyanka Gandhi on PM Modi Speech: लोकसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी के भाषण पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी के 11 संकल्पों को खोखला बताया। उन्होंने कहा, अगर प्रधानमंत्री जी भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, तो उन्हें अडाणी पर बहस करनी चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा, मेरे लिए यह नया अहसास था, मैंने सोचा था कि प्रधानमंत्री जी कुछ नया बोलेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

प्रियंका गांधी ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में एक नई चीज नहीं बोली, उन्होंने पूरी तरह बोर कर दिया। मुझे दशकों बाद स्कूल में मैथ के डबल पीरियड की याद आ गई। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान जेपी नड्डा, अमित शाह और पीयूष गोयल भी बोर होने लगे थे।

सिर्फ विपक्ष पर आरोप मढ़ते रहे प्रधानमंत्री

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानममंत्री ने कोई नई बात नहीं की, वे सिर्फ मुख्य विपक्षी दल के खिलाफ आरोप मढ़ते रहे। उन्होंने कहा, पूरे भाषण में सिर्फ कांग्रेस के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। हमने कल और आज खुलासा कर दिया कि पूरी सरकार अडाणी के लिए चल रही है। उन्होंने कहहा, राहुल गांधी के भाषण के समय प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अनुपस्थित थे। या तो वे राहुल गांधी का सामना करने से डरते हैं, या फिर वे विपक्ष में विश्वास नहीं करते हैं।

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर बोला हमला

बता दें, लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और नेहरू-गांधी परिवार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, अपने स्वार्थ के लिए कांग्रेस ने संविधान में कई संसोधन किए। यह परंपरा नेहरू जी ने शुरू की, उन्होंने जो बीज बोया, उसे खाद-पानी देने का काम इंदिरा गांधी ने किया और बाद में राजीव गांधी ने भी वही किया। प्रधानमंत्री ने कहा, कांग्रेस ने इमरजेंसी लगाकर संविधान का गला घोंट दिया। संवैधानिक संस्थाओं को बंद कर दिया। इमरजेंसी का यह पाप कांग्रेस के माथे से कभी नहीं धुलेगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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