Droupadi Murmu Rafale Video: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी है। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान का उनका अनुभव अविस्मरणीय रहा और इस पहली उड़ान ने देश की रक्षा क्षमताओं के प्रति उनमें गर्व की एक नयी भावना जागृत की है। राष्ट्रपति बुधवार सुबह हरियाणा के अंबाला स्थित वायुसेना स्टेशन पहुंचीं थीं। इस दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। बता दें कि भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान राफेल लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया था।
कितनी देर तक और कितनी ऊपर तक भरी उड़ान
सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति ने लगभग 30 मिनट तक विमान में सवारी की और करीब 200 किलोमीटर दूरी तय की। विमान 17वीं स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी ने उड़ाया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में यह जानकारी दी गई। राफेल विमान ने समुद्र तल से लगभग 15,000 फुट की ऊंचाई पर और लगभग 700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी।
राष्ट्रपति ने बाद में आगंतुक पुस्तिका (विजिटर बुक) में लिखा, 'अंबाला वायुसेना स्टेशन पहुंचकर वायुसेना के राफेल विमान में अपनी पहली उड़ान को लेकर मैं बहुत प्रसन्न हूं। राफेल में उड़ान भरना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहा। इस शक्तिशाली विमान पर इस पहली उड़ान ने मेरे अंदर देश की रक्षा क्षमताओं के प्रति गर्व की एक नयी भावना जगाई है। मैं भारतीय वायुसेना और अंबाला वायुसेना स्टेशन की पूरी टीम को इस सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।'
राष्ट्रपति भवन की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान में कहा गया था, 'राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कल हरियाणा के अंबाला जाएंगी, जहां वह राफेल विमान में उड़ान भरेंगी।'
सुखोई से भी भर चुकी हैं उड़ान
वहीं, सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर मुर्मू ने 8 अप्रैल, 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी और वह ऐसा करने वाली तीसरी राष्ट्रपति बन गई थीं।
पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने क्रमशः 8 जून, 2006 और 25 नवंबर, 2009 को पुणे के पास लोहेगांव वायुसेना स्टेशन से सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी।
राफेल के बारे में
फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल लड़ाकू विमान को सितंबर 2020 में अंबाला वायुसेना स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। पहले पांच राफेल विमानों को 17वीं स्क्वाड्रन 'गोल्डन एरोज' में शामिल किया गया था। ये विमान 27 जुलाई, 2020 को फ्रांस से यहां पहुंचे थे।
पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में आतंकी ढांचों को नष्ट करने के लिए सात मई को शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में राफेल विमानों का इस्तेमाल किया गया था। इन हमलों के बाद चार दिन तक भीषण सैन्य झड़प हुईं, जो सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनने के बाद 10 मई को समाप्त हुईं।
