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जलियांवाला बाग हत्याकांड की 107वीं बरसी आज, राष्ट्रपति मुर्मू और PM मोदी ने पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि

Modi tribute to Jallianwala Bagh Victims: जलियांवाला बाग नरसंहार पंजाब के अमृतसर में हुआ था, जहां बैसाखी के त्योहार के दौरान हजारों लोग जलियांवाला बाग में इकट्ठा हुए थे।

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जलियांवाला बाग हत्याकांड की 106वीं बरसी आज, राष्ट्रपति मुर्मू और PM मोदी ने पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि

Jallianwala Bagh Massacre: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 31 जनवरी को जलियांवाला बाग नरसंहार के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी और उन्हें ऐसे अमर स्वतंत्रता सेनानी बताया जिनके बलिदान ने एक नई चेतना जगाई और भारत की स्वतंत्रता के संकल्प को सुदृढ़ किया।

उन्होंने राष्ट्र के प्रति उनके निरंतर योगदान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी देशभक्ति पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। 13 अप्रैल, 1919 को हुआ यह नरसंहार भारत के औपनिवेशिक इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बना हुआ है और इसे देश के स्वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक मोड़ माना जाता है। संस्कृति मंत्रालय इसे साहस और प्रतिरोध का प्रतीक मानता है।

X पर एक संदेश में, राष्ट्रपति मुर्मू ने लिखा, 'मैं उन सभी अमर स्वतंत्रता सेनानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं, जिन्होंने जलियांवाला बाग में अपने प्राणों की आहुति दी। इस घटना ने देशवासियों में स्वतंत्रता के प्रति एक नई चेतना और दृढ़ संकल्प जगाया। राष्ट्र सदैव उनका ऋणी रहेगा। मुझे विश्वास है कि उनकी देशभक्ति की भावना हर किसी को समर्पण और निष्ठा के साथ राष्ट्र सेवा के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।'

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ितों के बलिदान को भारत की अदम्य भावना का एक सशक्त प्रतीक बताया, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।

उन्होंने X पर कहा, 'इस दिन, हम जलियांवाला बाग के वीर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका बलिदान हमारे लोगों की अदम्य भावना की एक सशक्त याद दिलाता है। उन्होंने जिस साहस और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया, वह आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करता रहेगा।'

13 अप्रैल 1919

यह नरसंहार पंजाब के अमृतसर में हुआ था, जहां बैसाखी के त्योहार के दौरान हजारों लोग जलियांवाला बाग में इकट्ठा हुए थे। वे वहां रॉलेट एक्ट का शांतिपूर्ण विरोध करने और नेताओं डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू की रिहाई की मांग करने के लिए भी आए थे।

ब्रिटिश अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड डायर ने अपनी टुकड़ियों को बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दिया। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, '1650 राउंड गोलियां चलाई गईं। गोलियां चलाना तभी बंद हुआ जब गोला-बारूद खत्म हो गया।' आधिकारिक ब्रिटिश रिकॉर्ड में 291 लोगों की मौत का जिक्र है, जबकि मदन मोहन मालवीय जैसे भारतीय नेताओं ने 500 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया था। संस्कृति मंत्रालय ने यह भी बताया कि ब्रिगेडियर जनरल डायर ने इस नरसंहार के दौरान अपने कृत्यों के लिए कोई पछतावा नहीं दिखाया।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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