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Atiq Ahmed समेत तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा, उमेश पाल अपहरण मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 28, 2023, 02:15 PM IST

Atiq Ahmed appeared in court: माफिया से राजनेता बने अतीक अहमद पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। हालांकि, उमेश पाल के अपहरण का केस ऐसा पहला मामला है, जिसमें अतीक को दोषी पाया गया है।

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अतीक अहमद

Photo : ANI

Mafia Atiq Ahmed News: उमेश पाल अपहरण मामले में माफिया अतीक अहमद समेत तीन लोगों को दोषी करार दिया गया है। अदालत ने अतीक अहमद, दिनेश पासी और खान सौलत हनीफ को आईपीसी की धारा 364ए,120बी के तहत दोषी पाया है। तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अदालत ने इसके साथ ही तीनों पर जुर्माना भी लगाया है।

इसके अलावा इस मामले में अतीक के भाई अशरफ समेत सात आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। बता दें, अतीक अहमद करीब चार दशकों से अपराध की दुनिया में सक्रिय है। उसके खिलाफ 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, लेकिन यह पहला मामला है, जिसमें अतीक को सजा मिली है।

2006 में हुआ था उमेश पाल का अपहरण

बता दें, 2004 में राजू पाल की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड के एक मात्र गवाह उमेश पाल का 2006 में अपहरण कर लिया गया था। पुलिस ने इस मामले में 11 लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें माफिया अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ भी शामिल था। उमेश पाल की बीती फरवरी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसका आरोप भी अतीक अहमद पर है।

कोर्ट के बाहर कड़ी सुरक्षा

अतीक की पेशी के मद्देनजर कोर्ट के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। किसी को भी बिना जांच आने जाने नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ इस केस से जुड़े लोगों को ही कोर्ट परिसर तक आने की इजाजत है। इसके अलावा पुलिस अतीक के गुर्गों पर भी कड़ी नजर रखे हुए है।

सोमवार को नैनी जेल पहुंचा था अतीक

अतीक अहमद 2019 से गुजरात की साबरमती जेल में बंद था। उसे सोमवार को सड़क के रास्ते प्रयागराज की नैनी जेल लाया, जहां उसे स्पेशल सेल में रखा गया। अतीक के बैरक की निगरानी सीसीटीवी के माध्यम से सीधे लखनऊ मुख्यालय द्वारा की जा रही है। अतीक अहमद व उसके भाई को मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत पहुंचाया गया।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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