Balasore Train Accident Post Traumatic Sress Disorder: बालासोर रेल हादसे में बचे कई लोग शारीरिक चोटों से उबर रहे हैं, लेकिन कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती 105 मरीजों में से करीब 40 में 'पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर' (PTSD) की प्रवृत्ति दिख रही है डॉक्टर्स ने यह जानकारी दी, ध्यान रहे कि पीटीएसडी, किसी भयानक घटना का अनुभव करने या उससे गुजरने के बाद सामान्य हो पाने की विफलता वाला विकार है।
नैदानिक मनोविज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ जसबंत महापात्रा ने कहा कि ट्रेन हादसे में बचे लोगों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल ने सभी मरीजों की 'काउंसलिंग' शुरू कर दी है। डॉ. महापात्रा ने कहा कि जीवित बचे लोगों के दिमाग पर इस तरह की दुर्घटना का गंभीर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक था।
'कई घायल व्यक्ति भयभीत और कभी-कभी घबराए हुए देखे गए'
उन्होंने कहा, 'कई घायल व्यक्ति गंभीर रूप से तनावग्रस्त, भयभीत और कभी-कभी घबराए हुए देखे गए। हम उनकी काउंसलिंग कर रहे हैं और उनके परिवार के सदस्यों के साथ उनसे बात कर रहे हैं।'
काउंसलिंग के लिए टीम का गठन किया है
डॉ. महापात्रा ने कहा कि अस्पताल ने बचे लोगों की काउंसलिंग के लिए चार टीम का गठन किया है। उन्होंने कहा, 'प्रत्येक टीम में एक मनोचिकित्सक, एक मनोवैज्ञानिक, एक सामाजिक कार्यकर्ता और रोगी के परिवार के एक या दो सदस्य शामिल हैं।'
लोग दुर्घटना से जुड़ा सपना देखकर कई बार अचानक नींद से जाग जाते हैं
सर्जरी विभाग की एक नर्स ने बताया कि रेल हादसे के शिकार लोग दुर्घटना से जुड़ा सपना देखकर कई बार अचानक नींद से जाग जाते हैं। उन्होंने बताया कि 23 वर्षीय एक युवक, जिसके दोनों हाथ और पैर दुर्घटना में टूट गए हैं, दिन-रात सो नहीं पाता है।एक डॉक्टर ने बताया कि हादसे में अपने करीबी मित्र को खोने वाला एक युवक अपने मित्र का नाम पुकारते हुए अचानक नींद से जाग जाता है।
