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हिजाब पर फिर शुरू हुई सियासत: गिरिराज बोले- कर्नाटक में लौटा 'शरिया कानून', समझें क्या है पूरा मामला

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 23, 2023, 11:56 AM IST

Karnataka Hijab Ban News: पिछली भाजपा सरकार ने कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंंध लगा दिया था। अब इस फैसले को वापस ले लिया गया है। बता दें, हिजाब को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ी गई थी।

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कर्नाटक में हिजाब बैन पर प्रतिबंध खत्म

Photo : BCCL

Karnataka Hijab Ban News: कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में लड़कियों के हिजाब पहनने पर लगे बैन को हटा लिया गया है। इसको लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि हम हिजाब सर्कुलर को वापस ले लेंगे। इस पर अब कोई प्रतिबंध नहीं है और लोग अपनी मर्जी से कपड़े पहन सकते हैं। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर से हिजाब पर सियासत शुरू हो गई है। भाजपा ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के इस फैसले की आलोचना की है और राज्य में इस्लामिक कानून लागू करने का आरोप लगाया है।

बता दें, कर्नाटक में भाजपा सरकार ने पिछले साल स्कूल-कॉलेजों में हिजाब प्रतिबंध का आदेश दिया था। इसके बाद देश में इस मुद्दे को लेकर काफी सियासत हुई थी और यह कानूनी लड़ाई का विषय भी बन गया था। इस दौरान सड़क से लेकर संसद तक यह मुद्दा जोर-शोर से उछला था और काफी विरोध प्रदर्शन भी हुआ था।

सिद्धारमैया ने क्या कहा?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को कहा कि खाने-पीने और कपड़े पहनने का मामला निजी है। मैं धोती पहनता हूं कोई शर्ट-पैंट पहन सकता है। इसमें गलत क्या है। उन्होंने कहा राजनीतिक फायदे के लिए इस तरह के मामलों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। बता दें, कर्नाटक में कांग्रेस ने चुनाव से पहले सत्ता में आने पर हिजाब पर प्रतिबंध को खत्म करने का संकेत दिया था। इसके बाद इसी साल कर्नाटक सरकार ने प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में लड़कियों को हिजाब पहन कर आने की अनुमति दे दी थी।

भाजपा ने किया फैसले का विरोध

अब भाजपा ने कर्नाटक सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। भाजपा ने कहा है कि मुख्यमंत्री शांतिपूर्ण समाज में धर्मांधता का जहर घोलने जा रहे हैं। यूनिफॉर्म छात्र-छात्राओं में समानता सुनिश्चित करती है, लेकिन मुख्यमंत्री लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। सिद्धारमैया वोट बैंक की राजनीति के लिए तरह का फैसला ले रहे हैं। इस मामलें में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक में एक बार फिर से शरिया कानून लागू हो गया है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन की सरकार जहां-जहां सत्ता में आएगी वहां इस्लामिक कानून लागू करेगी।

हिजाब पर कोर्ट ने क्या कहा था?

कर्नाटक में हिजाब बैन का मामला कोर्ट पहुंचा था। पिछली भाजपा सरकार ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन कोर्ट ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा था कि छात्र-छात्राओं को निर्धारित यूनिफॉर्म को ही पहनना होगा। शिक्षण संस्थान में ऐसे कपडे पहने जाने चाहिए जो बराबरी और एकता का संदेश दें, इसकी वजह से समाज में अशांति न रहे। कोर्ट ने आगे कहा था कि हिजाब पहनना धार्मिक रीति-रिवाज का हिस्सा नहीं है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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