देश

संभल की शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली को पुलिस ने हिरासत में लिया, हिंसा भड़काने का आरोप

Sambhal Violence Case: संभल हिंसा मामले में यूपी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली को पुलिस ने पूछताछ के बाद हिरासत में ले लिया है। उन पर हिंसा भड़काने का आरोप है। वहीं बीते शुक्रवार को संभल की शाही जामा मस्जिद में रंगाई-पुताई का कार्य पूरा हो गया है।

Image

संभल हिंसा (फाइल फोटो)

Photo : ANI

Police Detained Zafar Ali head of Shahi Jama Masjid of Sambhal: उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई थी, इस मामले में यूपी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली को संभल पुलिस ने हिंसा भड़काने के आरोप में हिरासत में लिया है।

जामा मस्जिद सदर जफर अली को पुलिस ने हिरासत में लिया

पिछले साल 24 नवंबर, 2024 को संभल में हिंसा भड़क गई थी। जिसके बारे पूछताछ के लिए शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली को थाने बुलाया गया था। मामले की जांच कर रही SIT ने जामा मस्जिद सदर जफर अली को थाने बुलाया, उनसे पूछताछ हुई और पूछताछ के बाद जफर अली को हिरासत में ले लिया गया।

संभल की शाही जामा मस्जिद में रंगाई-पुताई का कार्य पूरा

संभल की शाही जामा मस्जिद में बीते शुक्रवार (21 मार्च, 2025) को रंगाई-पुताई का कार्य पूरा हो गया। इस सप्ताह की शुरुआत में अदालत के आदेश के बाद इसकी शुरुआत हुई थी। जामा मस्जिद समिति के सचिव मसूद फारूकी ने बताया कि रंगाई पुताई का काम पूरा हो गया है और लाइटिंग का काम चल रहा है जिसके आज पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, 'इसके लिए उच्च न्यायालय ने एक सप्ताह की समय सीमा दी थी और हमें विश्वास है कि काम निर्धारित समय के भीतर पूरा हो जाएगा।'

एएसआई की देखरेख में रविवार से चल रहा था यह कार्य

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की देखरेख में यह कार्य रविवार से चल रहा है। मस्जिद प्रबंधन ने पहले ढांचे के चारों ओर सफेदी तथा अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था की अनुमति मांगी थी। मुगलकालीन मस्जिद में सफेदी उस समय की गई है जब इसे लेकर कानूनी विवाद चल रहा है। एक याचिका में दावा किया गया था कि मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर के ऊपर किया गया था। पिछले साल नवंबर में एक स्थानीय अदालत द्वारा मस्जिद के एएसआई सर्वे का आदेश दिए जाने के बाद संभल में दंगे भड़क उठे थे।

सर्वेक्षण के दौरान भड़की हिंसा में चार लोगों की मौत हो गयी थी और कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने 12 मार्च को एएसआई को मस्जिद की बाहरी दीवारों की सफेदी एक हफ्ते के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article