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एक और सीमा हैदर: अब पोलैंड की बारबरा को हुआ झारखंड के शादाब से प्यार, छह साल की बच्ची के साथ पहुंची गांव

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 22, 2023, 09:11 AM IST

Barbara Polak: पोलैंड निवासी बारबरा पोलक बताती हैं कि वह इंस्टाग्राम के जरिए शादाब से जुड़ी थीं। धीरे-धीरें बातें हुई और कब प्यार हो गया पता ही नहीं चला। अब यह 49 वर्षीय महिला शादाब से शादी करना चाहती हैं, इसलिए वह भारत आई हुई हैं।

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शादाब और बेटी के साथ बारबरा पोलक (https://www.instagram.com/barbara_polak_/?hl=en)

Barbara Polak: देश में इन दिनों सीमा हैदर की प्रेम कहानी की चारों ओर चर्चा है। ATS उससे लगातार पूछताछ कर रही है और कई लोग सीमा हैदर पर पाकिस्तानी जासूस होने का आरोप भी लगा रहे हैं। इस बीच ऐसा ही एक और मामला झारखंड से सामने आया है। यहां हजारीबाग के एक युवक प्यार में पोलैंड की एक महिला उसे गांव पहुंच गई है, उसके साथ उसकी छह साल की बच्ची भी है।

पोलैंड निवासी बारबरा पोलक बताती हैं कि वह इंस्टाग्राम के जरिए शादाब से जुड़ी थीं। धीरे-धीरें बातें हुई और कब प्यार हो गया पता ही नहीं चला। अब यह 49 वर्षीय महिला शादाब से शादी करना चाहती हैं, इसलिए वह भारत आई हुई हैं। उनका कहना है कि शादाब और उनका गांव उन्हें बहुत प्यारा लगता है और अब अब शादाब के साथ ही रहना चाहती हैं।

लॉकडाउन में शुरू हुई थी बातचीत

शादाब बताते हैं कि यूरोप के पोलैंड निवासी बारबरा पोलक से उनकी बातचीत लॉकडाउन के दौरान शुय हुई थी। धीरे-धीरे दोस्ती हुई और अब प्यार। वह बताते हैं कि जल्द ही हम दोनों शादी के बंधन में बंधना चाहते हैं। भारत में बहुत गर्मी पड़ती है, इसलिए शादाब ने बारबरा के लिए दो एसी भी लगवाएं हैं और उनके लिए कलर टीवी भी खरीदा है।

तलाक शुदा हैं बारबरा

बारबरा कहती हैं कि शादाब बहुत ही प्यारे व्यक्ति हैं और वह उनके साथ बहुत खुश हैं। दोनों साथ ही रहना चाहते हैं। जानकारी के मुताबिक, बारबरा शादी-शुदा हैं और उनका तलाक भी हो चुका है। पहली शादी से उनकी एक छह साल की बच्ची भी है, जो शादाब को डैड कहकर बुलाती है। बारबरा फिलहाल शादाब के घरवालों से घुलने-मिलने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए उन्होंने घर के कामों में भी हाथ बंटाना शुरू कर दिया है। उधर, मामले की जानकारी होते ही स्थानीय पुलिस भी शादाब के घर पहुंची। उसने बारबरा का पासपोर्ट और वीजा की जांच की।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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