Parliament New Building Row: 28 मई को ऐतिहासिक कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) नई संसद का उद्घाटन करने वाले हैं। लेकिन उससे पहले सियासत गरमा गई है। कांग्रेस समेत 20 दलों का कहना है कि राष्ट्रपति द्वारा उद्घाटन ना कराया जाना लोकतंत्र और संविधान पर हमला है। विपक्ष के इस तेवर का जवाब बीजेपी ने तुरंत दिया और कई उदाहरणों के जरिए यह बताया कि आखिर कांग्रेस किस संविधान और लोकतंत्र की बात कर रही है हकीकत तो यह है कि कांग्रेस ने समय समय पर अपमान ही किया है। अब पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद इस पर चुप्पी तोड़ी है, दिल्ली-देहरादून वंदे भारत एक्स्प्रेस को हरी झंडी दिखाने के बाद ऑस्ट्रेलिया में प्रवासी भारतीयों के संबोधन का खास जिक्र किया।पीएम मोदी ने कहा कि सिडनी में जब वो प्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम में शामिल हुए तो ना सिर्फ मौजूदा पीएम एंथनी अल्बनीज बल्कि पूर्व पीएम समेत विपक्षी दलों के कई सांसद शामिल हुए। उन लोगों का कार्यक्रम में शामिल होना ही लोकतंत्र की मजबूती है। सभी लोग दलगत राजनीति से परे जा कार्यक्रम का हिस्सा बने।
विपक्ष की राय
एक संयुक्त बयान में, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने कहा कि जब लोकतंत्र की आत्मा को संसद से चूस लिया गया है, तो हमें नई इमारत में कोई मूल्य नहीं मिलता है। हम नए भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने के अपने सामूहिक निर्णय की घोषणा करते हैं। हालांकि बीजू जनता दल, वाईएसआरसीपी और टीडीपी जैसे कुछ दल, जो एनडीए में नहीं हैं, ने इस कार्यक्रम में भाग लेने का फैसला किया है।
ये दल होंगे शामिल
बीजेडी, वाईएसआरसीपी, शिरोमणि अकाली दल, टीडीपी, शिवसेना, शिंदे गुट, एआईएडीएमके, एनपीपी, एनडीडीपी, सिक्किम क्रांति मोर्चा, मिजो नेशनल फ्रंट, जननायक जनता पार्टी, आरएलजेपी, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, अपना दल एस, आईएमकेएमके, तमिल मनीला कांग्रेस
ये दल नहीं होंगे शामिल
कांग्रेस, एनसीपी, आम आदमी पार्टी, टीएमसी, जेडीयू, डीएमके, सीपीआई-एम, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, सीपीआई, केरला कांग्रेस मणि, झारखंज मुक्ति मोर्चा, आरएसपी, आरएलडी, एमडीएमके, वीसीके, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, शिवसेना उद्धव ठाकरे
