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Amrit Bharat Station: पीएम मोदी आज लॉन्च करेंगे अमृत भारत स्टेशन योजना, 508 स्टेशनों की बदलेगी सूरत; जानिए इस योजना की हर छोटी-बड़ी बात

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 6, 2023, 07:09 AM IST

Amrit Bharat Station Yojana: अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देश भर के 508 स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी जाएगी। इस योजना के तहत 24470 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पीएम मोदी आज योजना को वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लॉन्च करेंगे।

Amrit Bharat Station Yojana: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अमृत भारत स्टेशन योजना का शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पीएम मोदी इस कार्यक्रम में जुड़ेंगे और रेलवे के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा शिलान्यास कार्यक्रम होगा। जानकारी के मुताबिक, अमृत भारत स्टेशन येाजना के तहत देश भर के 508 स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी जाएगी।

इस योजना के तहत जिन 508 स्टेशनों का नवीनीकरण किया जाएगा, वे भारत 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हैं। इसमें उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 55-55 स्टेशन, बिहार के 49, महाराष्ट्र के 44, पश्चिम बंगाल के 37, मध्य प्रदेश के 34, असम में 32, ओडिशा के 25, पंजाब के 22, गुजरात और तेलंगाना के 21-21, झाखंउ के 20, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु के 18-18, हरियाणा के 15 व कर्नाटक के 13 स्टेशन शामिल हैं।

यात्रियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

पीएमओ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, अमृत भारत स्टेशन योजना का उद्देश्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराना है। इस दृष्टिकोण के तहत 1309 स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए योजना शुरू की गई है। पीएम मोदी आज 508 स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखेंगे। यह है योजना का उद्देशय-

  • स्टेशनों का सिटी सेंट के रूप में विकास
  • शहर के दोनों छोरों का एकीकरण
  • स्टेशन भवनों का सुधार व पुनर्विकास
  • बेहतर यातायाता व्यवस्था, इंटरमोडल इंटीग्रेशन
  • आधुनिक यात्री सुविधाएं
  • मार्गदर्शन के लिए एक समान और सहायक सूचक
  • लैंडस्केपिंग, स्थानीय कला और संस्कृति

24470 करोड़ आएगी लागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, भारत के रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए शुरू की जा रही अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 24470 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के यात्रियों को स्टेशन परिसर में आधुनिक व विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। स्टेशन पर लागू की जाने वाली सुविधाओं में फुट-ओवरब्रिज, एस्केलेटर, लिफ्ट, कार पार्किंग, सीसीटीवी जैसी तमाम सुविधाएं शामिल हैं। इस परियोजना का काम दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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