PM Modi Review Meeting With Ministers: प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संदर्भ में उठाए जा रहे उपायों की समीक्षा के लिए सीसीएस बैठक की अध्यक्षता की। कृषि, उर्वरक, जहाजरानी, विमानन, रसद और लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे हस्तक्षेपों पर चर्चा की गई। आवश्यक आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कमी करने और बिजली क्षेत्र से संबंधित उपायों की समीक्षा की गई।
जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई
आवश्यक वस्तुओं की स्थिर कीमतों को सुनिश्चित करने और जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मूल्यों की निरंतर निगरानी और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रवर्तन पर बातचीत के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यूरिया उत्पादन बनाए रखने और डीएपी/एनपीकेएस आपूर्ति के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय जैसे विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने आम आदमी की महत्वपूर्ण जरूरतों की उपलब्धता का आकलन किया। प्रधानमंत्री ने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ और रबी मौसमों में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने गलत सूचना और अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक समय पर और सुचारू रूप से प्रामाणिक जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राजनाथ, शाह और कई मंत्रियों सहित अजीत डोभाल भी शामिल
बैठक में जो केंद्रीय मंत्री शामिल हुए उनमें राजनाथ सिंह, अमित शाह, एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जे पी नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रह्लाद जोशी, के. राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी शामिल थे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के दो प्रधान सचिव पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास और कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन भी इसमें शामिल थे।
पिछले रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रहे भयंकर युद्ध से उत्पन्न स्थिति को "चुनौतीपूर्ण" बताया और सभी नागरिकों से कठिनाइयों को दूर करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। पीएम मोदी ने मौजूदा संकट का राजनीतिकरण करने वालों को भी आगाह किया और उनसे ऐसा करने से बचने को कहा। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में स्वार्थपूर्ण राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि अफवाहें फैलाने वाले देश को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने कहा, वर्तमान में हमारे पड़ोस में एक महीने से भयंकर युद्ध चल रहा है। ये निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण समय हैं। आज, 'मन की बात' के माध्यम से, मैं एक बार फिर अपने सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करना चाहिए। 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों के उसी समूह के साथ इसी तरह की बैठक की और पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की। आम लोगों की महत्वपूर्ण जरूरतों, जिनमें भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा शामिल है, की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया।
उस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह संघर्ष एक बदलती हुई स्थिति है और इससे पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में प्रभावित है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में, नागरिकों को इस संघर्ष के प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। पीएम मोदी ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी विभाग मिलकर काम करें ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो।
पीएम मोदी ने की थी सीएम और उप-राज्यपालों संग चर्चा
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट और भारत पर उसके संभावित प्रभाव के संदर्भ में तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों और उप राज्यपालों के साथ एक बैठक की। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई। इस दौरान, पीए मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए अहम सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि ये सुझाव उभरती स्थिति का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने भावी चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्कता, तैयारियों और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
पीआईबी के मुताबिक, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास इस तरह के वैश्विक व्यवधान से निपटने का पहले का अनुभव है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए सामूहिक प्रयासों को याद किया, जब केंद्र और राज्यों ने 'टीम इंडिया' के रूप में मिलकर आपूर्ति शृंखलाओं, व्यापार और दैनिक जीवन पर प्रभाव को कम करने के लिए काम किया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि यही सहयोग और समन्वय की भावना वर्तमान परिस्थितियों से निपटने में भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया था कि हालात लगातार बदल रहे है, जिसके लिए निरंतर निगरानी और अनुकूल रणनीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 3 मार्च से एक अंतर-मंत्रालयी समूह सक्रिय है, जो दैनिक आधार पर स्थिति की समीक्षा कर रहा है और समय पर निर्णय ले रहा है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, नागरिकों के हितों की रक्षा करना और उद्योग एवं आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूती प्रदान करना है।
