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PM Modi in Mysuru: पीएम मोदी ने जारी किए बाघों से जुड़े आंकड़े, कहा- हमने उन्हें भारत में अनुकूल ईको सिस्टम दिया

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 9, 2023, 02:22 PM IST

What is Project Tiger: देश में प्रोजेक्ट टाइगर के आज 50 साल पूरे हो गए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाघों से जुड़े नए आंकड़े जारी किए। उन्होंने कहा, जिस समय हमने अपनी आजादी के 75 साल पूरे किए हैं, उसी समय दुनिया में बाघों की करीब 75 फीसदी आबादी भारत में ही है।

Project Tiger: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने मैसूर दौरे पर हैं। उन्होंने ने बांदीपुर टाइगर रिजर्व का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने पर मेगा इवेंट में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने के अवसर पर स्मरणोत्सव कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने टाइगर सेंसस 2022 जारी किया। बताया, बाघों की संख्या बढ़कर 3167 हो गई है। 2018 के सेंसस में यह संख्या 2967 थी। वहीं 2014 में 2226 थी। पीएम ने कहा, दशकों पहले चीता भारत से विलुप्त हो गए थे। हम नाबीबिया से चीते भारत लेकर आए। कुछ दिन पहले कूनो नेशनल पार्क में चीतों ने चार सुंदर शावकों को जन्म दिया है। उन्होंने कहा, भारत ने चीतों को बचाया है, साथ ही उनके अनुकूल ईको सिस्टम दिया है।

प्रोजेक्ट टाइगर के मेगा इवेंट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमृत काल के दौरान देश में बाघ संरक्षण के लिए सरकार के विजन को भी साझा किया। साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट्स एलायंस (IBCA) भी लॉन्च किया। बता दें, आईबीसीए दुनिया की सात बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए काम करेगा। इसके लिए उन देशों की सहायता ली जाएगी, जहां इस तरह की प्रजातियां पाई जाती हैं।

फ्रंटलाइन फील्ड स्टाफ से की मुलाकात

प्रधानमंत्री ने इस दौरान बांदीपुर टाइगर रिजर्व दौरा किया। उन्होंने बाघों के संरक्षण में लगे फ्रंटलाइन फील्ड स्टाफ और स्वयं सहायता समूहों के साथ बातचीत भी की। उन्होंने चामराजनगर जिले के मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में हाथी शिविर का भी दौरा किया। इस दौरान प्रधानमंत्री काफी अलग अंदाज में दिखाई दिए। उन्होंने यहां जानवरों और प्रकृति के बीच वक्त बिताया और फोटोग्राफी भी की।

क्या है प्रोजेक्ट टाइगर

भारत में वर्तमान में करीब तीन हजार बाघ हैं। यह संख्या दुनिया के जंगली बाघों की आबादी के 70 प्रतिशत से ज्यादा है। अधिकारियों के मुताबिक, बाघों की संख्या प्रति वर्ष छह प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इनके संरक्षण के लिए 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर लॉन्च किया गया था। इसके तहत टाइगर रिजर्व बनाए गए थे। शुरुआती दौरे में 18278 वर्ग किमी में नौ टाइगर रिजर्व शामिल थे। अब 75000 वर्ग किमी में 53 टाइगर रिजर्व हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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