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PM Modi meets Sandeshkhali Victims: संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं से पीएम मोदी ने की मुलाकात, दर्द सुनकर हो गए भावुक

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 6, 2024, 03:26 PM IST

PM Modi meets Sandeshkhali women during Bengal Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि महिलाओं का दर्द सुनकर पीएम मोदी काफी भावुक नजर आए।

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संदेशखाली की पीड़िताओं से मिले प्रधानमंत्री

Photo : Twitter

PM Modi meets Sandeshkhali Victims Women: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि महिलाओं का दर्द सुनकर पीएम मोदी काफी भावुक नजर आए। बीजेपी सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी ने संदेशखाली की पीड़ित महिलाओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपनी आपबीती पीएम के सामने रखी और प्रधानमंत्री ने एक पिता की तरह उसे धैर्यपूर्वक सुना। पीड़ित इस बात से काफी भावुक थे कि पीएम मोदी ने उनका दर्द समझा।

इससे पहले पीएम मोदी ने संदेशखाली की घटना को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा, इसी धरती पर टीएमसी के राज में नारी शक्ति पर अत्याचार का घोर पाप हुआ है। संदेशखाली में जो कुछ भी हुआ, उससे किसी का भी सिर शर्म से झुक जाएगा। लेकिन, यहां की टीएमसी सरकार को आपके दुख से कोई फर्क नहीं पड़ता। टीएमसी सरकार बंगाल की महिलाओं के साथ अत्याचार करने वाले गुनाहगारों को बचाने के लिए पूरी शक्ति लगा रही है।

पीएम मोदी: टीएमसी को बांग्ला बहन-बेटियों पर भरोसा नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से भी राज्य सरकार को झटका लगा है। गरीब, दलित, वंचित, आदिवासी परिवारों की बहन-बेटियों के साथ टीएमसी के नेता जगह-जगह अत्याचार कर रहे हैं। लेकिन, टीएमसी सरकार को अपने अत्याचारी नेता पर भरोसा है, बांग्ला बहन-बेटियों पर भरोसा नहीं है। इस व्यवहार से बंगाल की महिलाएं, देश की महिलाएं आक्रोश में हैं। नारी शक्ति के आक्रोश का ये ज्वार संदेशखाली तक ही सीमित नहीं रहने वाला। मैं देख रहा हूं टीएमसी के माफिया राज को ध्वस्त करने के लिए बंगाल की नारी शक्ति निकल चुकी हैं। उन्होंने कहा, 'संदेशखाली ने दिखाया है कि पश्चिम बंगाल की बहन-बेटी की बुलंद आवाज सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही है। तुष्टिकरण और टोलाबाजों के दबाव में काम करने वाली टीएमसी सरकार कभी भी बहन-बेटियों को सुरक्षा नहीं दे सकती। वहीं, दूसरी तरफ भाजपा की केंद्र सरकार है, जिसने बलात्कार और रेप जैसे संगीन अपराध के लिए फांसी की सजा तक की व्यवस्था की है। संकट के समय में बहनें आसानी से शिकायत कर सकें, इसके लिए महिला हेल्पलाइन बनाई गई है। लेकिन, टीएमसी सरकार इस व्यवस्था को यहां लागू नहीं होने दे रही है। ऐसी महिला विरोधी टीएमसी सरकार महिलाओं का कभी भला नहीं कर सकती।

संदेशखाली की पीड़ित: महिलाओं ने लगाए थे संगीन आरोप

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली की महिलाओं ने टीएमसी नेता शाहजहां शेख व उसके गुर्गों पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिलाओं का आरोप था शाहजहां शेख और उसके गर्गों ने जबरन उनकी जमीन हड़पी इसके साथ ही उनके साथ यौन अत्याचार भी किया। महिलाओं के इस आरोप के बाद से बीजेपी ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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