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GST Fraud: जीएसटी रजिस्ट्रेशन में हो रहे फर्जीवाड़े की जांच की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल, जानें- क्या है आरोप

सुप्रीम कोर्ट में जीएसटी पंजीकरण घोटालों पर जनहित याचिका दाखिल की गई है। आधार और पैन की चोरी से फर्जी कंपनियां बनाने का आरोप लगाया गया है। जहां अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग करते हुए जांच और सुरक्षा उपायों की अपील की गई है।

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जीएसटी रजिस्ट्रेशन में हो रहे फर्जीवाड़े पर SC में याचिका। Photo-PTI

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में एक अहम जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) पंजीकरण में गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े को रोकने की मांग की गई है। याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील एडवोकेट रुद्र विक्रम सिंह ने फाइल की है।

चोरी के आधार-पैन कार्ड से बन रहा जीएसटी नंबर

याचिका में दावा किया गया है कि आधार और पैन की चोरी कर फर्जी कंपनियां बनाई जा रही हैं और ऑटो-अप्रूवल सिस्टम के कारण बिना जांच के जीएसटी नंबर जारी हो जाते हैं। इससे देशभर में हजारों करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है और आम नागरिकों की पहचान का दुरुपयोग किया जा रहा है।

याचिका में जीएसटी फर्जीवाड़े को लेकर क्या कहा गया है?

याचिकाकर्ता रुद्र विक्रम सिंह ने बताया कि उनका पैन कार्ड और हस्ताक्षर जालसाजी से इस्तेमाल कर कर्नाटक के बल्लारी में आरवीएस एंटरप्राइजेज नाम से एक फर्जी फर्म पंजीकृत कर दी गई। इस फर्म को जीएसटी नंबर भी मिल गया और 37 लाख से ज्यादा के फर्जी बिल जारी किए गए। जब शिकायत की गई तो पता चला कि पंजीकरण पूरी तरह ऑटो-अप्रूवल पर हुआ था, जिसमें किसी अधिकारी ने दस्तावेज़ की जांच ही नहीं की।

सरकार के संसद में पेश की गई रिपोर्ट का दिया हवाला

याचिका में संसद और सरकारी रिपोर्टों का हवाला दिया गया है। जिसके मुताबिक:

1. 2018 में ही जीएसटी खुफिया निदेशालय ने 1200 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा पकड़ा था।

2. 2020 तक 11 हजार करोड़ से ज्यादा के घोटाले सामने आए।

3. 2021 में सिर्फ तीन महीने में 20 हजार करोड़ रुपये की फर्जीवाड़े की रिपोर्ट आई।

4. 2023 में सरकार ने संसद में माना कि 21,791 फर्जी पंजीकरण मिले और 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी पकड़ी गई।

5. 2024 और 2025 में भी अलग-अलग राज्यों में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले उजागर हुए।

नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा

याचिका में कहा गया है कि ऐसे मामलों से न सिर्फ राजस्व को नुकसान होता है बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकार भी प्रभावित होते हैं। किसी व्यक्ति की निजी जानकारी का दुरुपयोग कर उसे कर चोरी या अपराध से जोड़ दिया जाता है, जिससे उसकी प्रतिष्ठा और आजीविका पर आंच आती है। इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के उल्लंघन के रूप में देखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट से मांगी गई ये राहत

1. जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया में अनिवार्य जांच और आधार आधारित ई-केवाईसी लागू की जाए।

2. पैन और आधार डेटा की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

3. एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र या समिति गठित की जाए।

4. जिन मामलों में अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत दिखे, उन्हें सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए।

क्यों अहम है यह एडवोकेट रुद्र विक्रम सिंह का उठाया ये मुद्दा

जीएसटी अब तक देश के लिए 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व जुटा चुका है और हर महीने औसतन 1.5 लाख करोड़ रुपये की वसूली होती है। ऐसे में अगर पंजीकरण प्रक्रिया ही फर्जीवाड़े से ग्रस्त हो तो पूरा कर ढांचा खतरे में पड़ सकता है। यही कारण है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देशभर के करोड़ों करदाताओं की सुरक्षा और भरोसे से जुड़ा है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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