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राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका, उद्घाटन समारोह पर रोक की मांग

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 17, 2024, 04:07 PM IST

Ram Mandir Ayodhya: इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में शंकराचार्यों की ओर से उठाई गई आपत्तियों का हवाला दिया गया है। प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को सनातन विरोधी बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की गई है।

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राम मंदिर

Photo : Twitter

Ram Mandir Ayodhya: अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर के उद्घाटन का मामला अदालत तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्राण-प्रतिष्ठा पर प्रतिबंध की मांग करते हुए याचिका दायर की गई है। जानकारी के मुताबिक, याचिका में शंकराचार्यों की ओर से उठाई गई आपत्तियों का हवाला दिया गया है। साथ ही इस समारोह को सनातन विरोधी बताया गया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह याचिका गाजियाबाद के रहने वाले भोला दास ने दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि 22 जनवरी को आयोध्या में एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। निर्माणाधीन मंदिर में रामलला की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा। इसमें आगे कहा गया है कि शंकराचार्यों ने प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम पर आपत्ति उठाई है और कहा है कि पूस के महीने में कोई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाता है।

अधूरे मंदिर का हलावा

भोला दास की ओर से दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि मंदिर का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है और इसमें प्राण-प्रतिष्ठा की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ पूजा करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अधूरे मंदिर में किसी भी देवता को विराजमान नहीं किया जाता है। याचिका में प्राण-प्रतिष्ठा पर बैन की मांग करते हुए पूरे कार्यक्रम को सनातन विरोधी बताया गया है। दावा किया गया है कि भारतीय नता पार्टी लोकसभा चुनाव में फायदे के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।

मंगलवार से शुरू हुए अनुष्ठान

राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी को होना है। इससे पहले बीते मंगलवार से मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा से पहले के अनुष्ठान शुरू कर दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, 11 पुजारियों द्वारा अनुष्ठान सम्पन्न कराया जा रहा है। इन अनुष्ठानों के लिए यजमान मंदिर न्यास के सदस्य अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी ऊषा मिश्रा हैं। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत व अन्य कई दिग्गज शामिल होंगे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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