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'निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना के लिए अनुमति लेना जरूरी नहीं...' इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी व्यवस्था

इलाहाबाद हाईकोर्ट दो ईसाई निकायों-'मारानाथा फुल गोस्पेल मिनिस्ट्रीज' और 'एमैनुअल ग्रेस चैरिटेबल ट्रस्ट' की एक जैसी दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

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प्रतीकात्मक फोटो

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि उत्तर प्रदेश में निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना आयोजित करने के लिए किसी तरह का अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसा मौका आता है जहां प्रार्थना सभा का दायरा बढ़ता है और सार्वजनिक मार्ग या सार्वजनिक संपत्ति इसके दायरे में आती है तो ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता को पुलिस को सूचना देनी होगी और कानून के तहत आवश्यक अनुमति लेनी होगी।

हाईकोर्ट दो ईसाई निकायों- 'मारानाथा फुल गोस्पेल मिनिस्ट्रीज' और 'एमैनुअल ग्रेस चैरिटेबल ट्रस्ट' की एक जैसी दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें निजी परिसरों में प्रार्थना सभाएं आयोजित करने की अनुमति मांगी गई थी।इन रिट याचिकाओं को निस्तारित करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार का जवाब संज्ञान लेने के बाद उक्त आदेश पारित किया। राज्य सरकार ने बताया कि कानून में अनुमति लेने का ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

'निजी परिसरों में धार्मिक प्रार्थना आयोजित करने को लेकर याचिकाकर्ताओं पर कोई रोक नहीं'

पीठ ने कहा, 'राज्य सरकार के जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि निजी परिसरों में धार्मिक प्रार्थना आयोजित करने को लेकर याचिकाकर्ताओं पर कोई रोक नहीं है।' याचिका में कहा गया था कि दोनों ईसाई संगठन अपने निजी परिसरों में एक धार्मिक सभा का आयोजन करना चाहते थे, लेकिन राज्य सरकार ने इसकी अनुमति के लिए उनके आवेदन पर कार्रवाई नहीं की।

अदालत ने 27 जनवरी को अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार ऐसे मामले में निर्णय कर सकती है जिसमें जरूरत पड़ने पर ऐसी सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी हो।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अनुच्छेद 25 का जिक्र किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अनुच्छेद 25 का जिक्र करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता है। जब कोई धार्मिक गतिविधि पूरी तरह निजी संपत्ति के भीतर और शांतिपूर्ण तरीके से की जा रही हो, तो उसे कानून के दायरे में अनुमति के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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