Parliament Monsoon Session: संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित हो गई है। यह सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष के तकरार की भेंट चढ़ गया। लोकसभा में केवल एक एंटी-पेपर लीक बिल पर ही चर्चा हो पाई। लोकसभा एवं राज्यसभा के कामकाज पर रिजिजू ने कहा कि निम्न सदन में 19 प्रतिशत और उच्च सदन में 30 प्रतिशत कामकाज हुआ। वहीं, पूरे सत्र में महज 5 घंटे काम हुए।
सत्र न चलने पर बीजेपी के दिग्गज नेता रविशंकर प्रसाद ने चिंता जाहिर की। उन्होंने इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह सत्र विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया। संसद का पूरा मानसून सत्र विपक्ष के नेता के अहंकार, मनमानी, विशेषाधिकार की भावना और पूर्ण अनुशासनहीनता की वेदी पर बलिदान हो गया।"
'लोकसभा में चर्चा न होना लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के लिए ठीक नहीं'
वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित हुए। संसद की कार्ववाही में गतिरोध के लिए उन्होंने विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए रिजिजू ने कहा कि विपक्ष ने लोकसभा नहीं चलने दी। सरकार चर्चा करने के लिए तैयार थी लेकिन विपक्ष इससे भाग खड़ा हुआ। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोकसभा में चर्चा न होना लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के लिए ठीक नहीं। लोकसभा में केवल एक एंटी-पेपर लीक बिल पर ही चर्चा हो पाई। लोकसभा एवं राज्यसभा के कामकाज पर रिजिजू ने कहा कि निम्न सदन में 19 प्रतिशत और उच्च सदन में 30 प्रतिशत कामकाज हुआ।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, 'लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए, जबकि एक विधेयक पर चर्चा हुई। राज्यसभा में विधेयक पर पूरी तरह चर्चा हुई। केवल मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और कुछ अन्य दलों ने सदन से वॉकआउट किया, जबकि अन्य विपक्षी दलों ने चर्चा में हिस्सा लिया। हंगामा करते हुए भी मुद्दों पर चर्चा कीजिए। विपक्ष पहले संवाद में शामिल होता था, जबकि ये लोग विपक्ष की भूमिका में रहते हुए चर्चा से भाग जाते हैं।'
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी का मुद्दा हो या दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, इन मुद्दों को जरिए विपक्षी दलों के सदस्य लगातार सरकार को घेरती रही। वहीं, विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बयान की मांग करता रहा। हालांकि, अमित शाह ने विपक्ष के सवालों का सदन में जवाब देने का आश्वासन दिया, लेकिन विपक्ष अलग अलग मुद्दों को उठाते हुए चर्चा पर तैयार नहीं हुआ।
