Women Reservation Bill in Lok Sabha: सरकार बृहस्पतिवार को महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी, जिसका विपक्ष के कई दल विरोध करने और इसके परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के खिलाफ वोट करने की तैयारी में हैं। सरकार 'संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026' को एक बड़े सुधार के रूप में ला रही है। इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए एक विधेयक तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 भी पेश करेगी। इन तीनों विधेयकों को लोकसभा की आज की कार्यवाही में सूचीबद्ध किया गया है। लोकसभा के वर्तमान बजट सत्र के तहत तीन दिवसीय विशेष बैठक बुलाने का मकसद इन तीनों विधेयकों पर चर्चा और इन्हें पारित कराना है।
कौन पेश करेगा ये बिल?
बुलेटिन के मुताबिक, 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026' को बहस के लिए लोकसभा में पेश किया जाएगा।
बुलेटिन के अनुसार, पहले दो विधेयक जहां केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे, वहीं तीसरा विधेयक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन के पटल पर रखेंगे। बुलेटिन में कहा गया है कि लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने बहस के लिए 18 घंटे का समय आवंटित किया है और यह (बहस) शुक्रवार को भी जारी रह सकती है। लोकसभा में पारित होने के बाद ये विधेयक राज्यसभा के पास जाएंगे।
नए परिसीमन आयोग का गठन होगा
सरकार संसद के वर्तमान बजट सत्र के तहत विशेष बैठक के दौरान परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करेगी। इसके तहत केंद्र सरकार 'नवीनतम जनगणना आंकड़ों' के आधार पर और संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा तथा विधानसभाओं में सीटों के निर्धारण के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन कर सकेगी।
महिला आरक्षण से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से इस विधेयक की प्रति को संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 के साथ संसद सदस्यों के बीच वितरित किया गया है।
नए विधेयक के कई प्रावधान 2002 के कानून के समान हैं। इस विधेयक के माध्यम से 2002 के परिसीमन कानून को निरस्त कर दिया जाएगा।
परिसीमन विधेयक, 2026 के मसौदे के अनुसार, 'केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा एक आयोग का गठन कर सकती है, जिसे परिसीमन आयोग कहा जाएगा। आयोग में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे, 'एक सदस्य वे होंगे, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश हैं या रहे हैं, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाएगा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (खुद) या मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा नामित एक निर्वाचन आयुक्त, पदेन सदस्य होंगे और राज्य चुनाव आयुक्त पदेन सदस्य होंगे।'
सरकार परिसीमन आयोग को क्या दे रही राइट
विधेयक में कहा गया है कि केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा आयोग का कार्यकाल निर्दिष्ट कर सकती है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार, आयोग के अनुरोध पर आयोग का कार्यकाल उस अवधि के लिए बढ़ा सकती है, जिसे वह आवश्यक समझे।
विधेयक में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग संघ शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उस क्षेत्र के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों के लिए परिसीमन आयोग के रूप में काम करेगा, जो पाकिस्तान के कब्जे में है।'
इस विधेयक के मुताबिक, 'यह परिसीमन आयोग का कर्तव्य होगा कि वह नवीनतम जनगणना के आंकड़े के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लोकसभा में सीटों का आवंटन, प्रत्येक राज्य की विधानसभा में सीटों की कुल संख्या और लोकसभा और विधानसभा चुनाव के उद्देश्य से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करने का पुन: समायोजन करे।'
विधेयक में यह भी कहा गया है कि आयोग प्रत्येक राज्य के संबंध में अपने काम में सहायता करने के उद्देश्य से 10 व्यक्तियों को अपने साथ जोड़ेगा, जिनमें से पांच उस राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा सदस्य होंगे और पांच उस राज्य की विधानसभा के सदस्य होंगे। इसमें कहा गया है कि यदि लोकसभा में किसी राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच या उससे कम सदस्य हैं, तो ऐसे में उस प्रदेश से जुड़े सभी लोकसभा सदस्य आयोग के सहयोगी सदस्य होंगे।
विधेयक आयोग को भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त या उनके नामित व्यक्ति, भारत के महासर्वेक्षक या उनके नामित व्यक्ति या केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी अन्य अधिकारी या भौगोलिक सूचना प्रणाली के किसी विशेषज्ञ या किसी अन्य व्यक्ति को बुलाने की शक्ति देता है।
इसमें कहा गया है, 'आयोग प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को आवंटित लोकसभा सीटों और प्रत्येक राज्य की विधानसभा को सौंपी गई सीटों को एकल सदस्यीय क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में वितरित करेगा और संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर उनका परिसीमन करेगा।' मसौदा कानून में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र को इस तरह से परिसीमित किया जाएगा कि वह पूरी तरह से किसी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आ जाए।
लोकसभा में सीट की संख्या 850 करने का प्रस्ताव
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए बृहस्पतिवार को एक विधेयक संसद में पेश किया जाएगा, जिसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है। विधेयक में निर्वाचन क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।
विधेयक संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। इसमें कहा गया है कि 'लोकसभा में राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गए 815 से अधिक सदस्य नहीं होंगें और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जो संसद द्वारा पारित कानून के तहत प्रदान किए गए तरीके से चुने जाएंगे।'
विधेयक के अनुसार, 'जनसंख्या' अभिव्यक्ति से तात्पर्य उस जनगणना में सुनिश्चित की गई जनसंख्या से है, जिसके संबंधित आंकड़े प्रकाशित किए जा चुके हैं। फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं।
महिला आरक्षण अधिनियम 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को शीघ्रता से लागू करने के लिए सरकार बृहस्पतिवार को लोकसभा में एक संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन कानून से जुड़ा एक विधेयक और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी (विधानसभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों) के लिए एक विधेयक लाने की योजना बना रही है।
मसौदा संविधान संशोधन विधेयक में कहा गया है, 'अत: प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य लोकसभा, राज्यों की विधानसभाओं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं (जिनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाएं भी शामिल हैं) के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू करना है। यह आरक्षण उस परिसीमन कवायद के माध्यम से लागू किया जाएगा, जो नवीनतम प्रकाशित जनगणना के जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित होगा।'
विपक्ष करेगा विरोध
विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर कई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई जिसमें यह फैसला किया गया कि इसके परिसीमन से संबंधित प्रावधानों का पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू किया जाए।
महिला आरक्षण विधेयक से विभाजन: कांग्रेस नेता
महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता अनंत गाडगिल ने बुधवार को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच 'भावनात्मक विभाजन; हो सकता है और उन्होंने इस कानून को लाने में केंद्र सरकार की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाया।
आगामी जनगणना का जिक्र करते हुए गाडगिल ने एक बयान में कहा कि रिपोर्ट 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है और संविधान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वर्गों के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व का प्रावधान पहले से ही मौजूद है।
संसद का तीन दिवसीय एक विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है, जिसके दौरान 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है) में संशोधन पेश किए जाएंगे ताकि इसे 2029 में लागू किया जा सके।
गाडगिल ने जानना चाहा कि सरकार अद्यतन आंकड़ों की प्रतीक्षा करने के बजाय एक दशक से अधिक पुराने आंकड़ों के आधार पर 29 अप्रैल से पहले विधेयक को क्यों आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने इसे 'सोची-समझी चाल' बताते हुए दावा किया कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के परिणामस्वरूप उत्तरी राज्यों के लिए लोकसभा सीट में वृद्धि और दक्षिणी राज्यों के लिए सीट में इसी अनुपात में कमी हो सकती है, जिससे महाराष्ट्र का राजनीतिक महत्व भी कम हो सकता है।
गाडगिल ने परिणामों की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संसदीय प्रतिनिधित्व उत्तर में असमान रूप से अधिक और दक्षिण में कम हो जाता है तो समय के साथ यह देश में भावनात्मक उत्तर-दक्षिण विभाजन को जन्म दे सकता है।
बिल पर मोदी क्या बोले थे?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि यदि 2029 में लोकसभा और विभिन्न विधानसभाओं के चुनाव महिला आरक्षण के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ कराए जाते हैं तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत तथा जीवंत बनेगा। देश की महिलाओं को लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी कहा था कि जब महिलाएं नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी तब विकसित भारत की यात्रा और अधिक सशक्त एवं तेज होगी।
