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Pahalgam Attack: कश्मीर घाटी में सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर विदेशी आतंकी, पाकिस्तान की मदद से कर रहे घुसपैठ

Pahalgam Attack: 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हुई है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर घाटी में मौजूद विदेशी आतंकी जांच एजेंसियों के टारगेट पर है।

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सुरक्षा एजेंसियां FT मॉड्यूल के लोकल नेटवर्क को क्रैक डाउन करने में जुटी

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Pahalgam Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हुई है। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर घाटी में मौजूद विदेशी आतंकी (Foreign Terrorist) जांच एजेंसियों के टारगेट पर है। जानकारी के मुताबिक, कश्मीर में FT मॉड्यूल लगातार बढ़ रहा है। विदेशी आतंकी मॉड्यूल को ISI की मदद से बढ़ाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कश्मीर में विदेशी आतंकी ज्यादा सक्रिय है। पाकिस्तान विदेशी आतंकियों को भारत मे घुसपैठ करने में मदद कर रहा है।

लोकल नेटवर्क को क्रैक डाउन करने में जुटी एजेंसियां

सुरक्षा एजेंसियां FT मॉड्यूल के लोकल नेटवर्क को क्रैक डाउन करने में जुटी हुई है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि 2024 में कुल 68 आतंकवादी मारे गए, जिनमें से 42 विदेशी थे। ज्यादातर आतंकी FT हैं यानी पाकिस्तान से घुसपैठ कर घाटी में आए थे। ये आतंकवादी या तो नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ के दौरान मारे गए या फिर कश्मीर के अंदर सुरक्षाबलों की कार्रवाई में ढेर हुए। नार्थ कश्मीर के बारामुला ज़िले में सबसे ज़्यादा विदेशी आतंकी मारे गए है। बता दें, बारामुला में 9 मुठभेड़ों में कुल 14 आतंकी मारे गए है।

कई आतंकी संगठन कर रहे पाकिस्तान की मदद

जम्मू क्षेत्र में भी लगभग 40 आतंकियों में से 35-36 विदेशी थे। इस बदलाव की वजह से स्थानीय भर्ती में भारी गिरावट आई है। 2021 में 125 स्थानीय युवक आतंकवादी बने, 2022 में 100, 2023 में यह संख्या घटकर 22 रह गई, और 2024 में सिर्फ़ 7 युवक आतंकवादी बने। अब तो हालत यह है कि कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या 10 से भी कम रह गई है। पाकिस्तान ने इस कमी को पूरा करने के लिए अपने ट्रेन किए गए आतंकी भेजने शुरू कर दिए हैं। इसमें लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और उनके अन्य विंग जैसे TRF (द रेसिस्टेंस फ्रंट), PAFF (पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट), और कश्मीर टाइगर्स जैसे संगठन शामिल हैं।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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