जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की हलचल नजर आने लगी है। जम्मू में नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन संबंधी निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी के प्रमुख गुलाम नबी आजाद ने इसकी आलोचना की। कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने कहा कि जो लोग बाहर के हैं उन्हें जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में वोट नहीं डालना चाहिए। वे अपने राज्यों में सिस्टम के अनुसार सीलबंद लिफाफे में मतदान कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में मतदान का महत्व यह रहा है कि केवल स्थानीय लोग ही मतदान करते हैं। चाहे वह जम्मू हो या कश्मीर हो। उन्होंने यह बात उस सवाल पर कही कि जम्मू में एक वर्ष से अधिक समय से रह रहे लोग वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। गुलाम नबी आजाद ने हाल ही में डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी बनाई।
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने कहा कि इसका मतलब है कि जम्मू-कश्मीर के मतदाता के वोट का मूल्य समाप्त हो जाएगा। यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर देश में कहीं भी लागू नहीं है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को धार्मिक व क्षेत्रीय स्तर पर बांटने के बीजेपी के कथित प्रयासों को विफल किया जाना चाहिए क्योंकि चाहे वह कश्मीरी हो या डोगरा, हमारी पहचान और अधिकारों की रक्षा तभी संभव होगी जब हम एकसाथ आकर कोशिश करेंगे। महबूबा ने ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने आदेश में नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन को मंजूरी देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि जम्मू में भारत सरकार औपनिवेशिक सोच के तहत मूल निवासियों को विस्थापित कर नए लोगों को बसाने के लिए कार्रवाई कर रही है। मुफ्ती ने पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी पिछले कई साल से कह रही है कि अनुच्छेद 370 की धारा के कई प्रावधान हटाने के पीछे बीजेपी की एक गलत मंशा थी।
गौर हो कि जम्मू में अधिकारियों ने मंगलवार सुबह अधिकृत तहसीलदारों (राजस्व अधिकारियों) को एक वर्ष से अधिक समय से शीतकालीन राजधानी में रहने वाले लोगों को आवासीय प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार दिया था। इस कदम से वोटर लिस्ट के विशेष सारांश संशोधन में इन लोगों के नाम शामिल हो पाएंगे।
