Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के शताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने, सेना ने पहलगाम हमले का जवाब दिया। संघ प्रमुख ने कहा कि 'पहलगाम के मुद्दे पर हमें पता चला कि कौन-कौन से देश हमारे साथ है। यहां आतंकियों ने पहलगाम में धर्म पूछकर लोगों की हत्या की।' अमेरिकी टैरिफ पर भागवत ने कहा कि यूएस की टैरिफ नीति उनके हित के लिए है लेकिन उसकी मार सब पर पड़ रही है। उन्होंने आगे कहा कि श्रीलंका में, नेपाल में उथल-पुथल हो रही है, प्रशासन संवेदनशील नही होता तो असंतोष रहता है लेकिन असंतोष से ऐसा आंदोलन होना किसी के हित में नही है। हिंसक मांगो से परिवर्तन नही आता।
भागवत के संबोधन की मुख्य बातें-
-घातक विचारधारा वाला पंथ फैल रहा है-मोहन भागवत
-भारत प्राचीन हिंदू राष्ट्र है-मोहन भागवत
-जो किसी दूसरे धर्म ने नही दिया, हिंदू ने दिया-मोहन भागवत
-भारत संस्कृति राष्ट्रीयता है, यही हमारे लिए हिंदू राष्ट्रीयता है
-ऐसी किसी क्रांति से उद्देश्य की प्राप्ति नही होती
-ऐसी किसी क्रांति से परिवर्तन नही होता, बाहरी ताकतो को मौका मिल जाता है
-श्रीलंका-नेपाल हमारे अपने देश है, वे पहले भारत ही थे
-इसलिए हमारे पड़ोसी देशों में जो उथल-पुथल हो रही यह हमारे से दूर नहीं है
-हमारे अपने इस प्रकार की अस्थिरता उत्पन्न होना ठीक नहीं
-वे सब हमारे अपने देश हैं इसलिए चिंता का विषय है
-अराजकता की ओर सारा समाज बढ़ रहा है और यह सब देशों में हो रहा है
-इन परिस्थितियों के लिए जब विश्व पुनर्चिंतन करता है तो वह भारत की तरफ अपेक्षा से देखता है
-दुनिया भारत की तरफ देखती है कि वह कोई रास्ता निकालेगा
दुनिया आपसी निर्भरता के साथ चलती है-भागवत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा, 'अमेरिका द्वारा लागू की गई नई टैरिफ नीति उनके अपने हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। लेकिन उसका असर सब पर पड़ता है। दुनिया आपसी निर्भरता के साथ चलती है। इसी तरह किसी भी दो देशों के बीच संबंध बनाए रहते हैं। कोई भी देश अलग-थलग रहकर जीवित नहीं रह सकता। यह निर्भरता मजबूरी में नहीं बदलनी चाहिए, हमें स्वदेशी पर भरोसा करना होगा और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करना होगा। फिर भी हमें अपने सभी मित्र देशों के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखने चाहिए, जो हमारी इच्छा से हों, न कि किसी मजबूरी से।'
संघ प्रमुख ने प्राकृतिक आपदाओं पर चेताया
संघ प्रमुख ने कहा, '...प्राकृतिक आपदाएं बढ़ी हैं। भूस्खलन और लगातार बारिश सामान्य हो गई है। यह पैटर्न पिछले 3-4 वर्षों से देखा जा रहा है। हिमालय हमारी सुरक्षा दीवार है और पूरे दक्षिण एशिया के लिए जल का स्रोत है। अगर वर्तमान विकास के तौर-तरीके उन आपदाओं को बढ़ावा दे रहे हैं जो हम देख रहे हैं, तो हमें अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना होगा। हिमालय की मौजूदा स्थिति खतरे की घंटी बजा रही है।'
हिंसक आंदोलनों में कोई लक्ष्य हासिल नहीं होता-भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह के दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा, 'जब सरकार जनता से दूर हो जाती है और उनकी समस्याओं से अनजान रहती है और उनकी नीतियां उनके हितों में नहीं बनतीं, तो लोग सरकार के खिलाफ हो जाते हैं। लेकिन अपनी नाराजगी व्यक्त करने का यह तरीका किसी के लिए लाभदायक नहीं होता। अगर अब तक की सभी राजनीतिक क्रांतियों का इतिहास देखें, तो उनमें से कोई भी अपने उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर पाईं, जिन देशों में सरकारें थीं, वहां की सभी क्रांतियों ने अग्रणी देशों को पूंजीवादी राष्ट्रों में बदल दिया। हिंसक आंदोलनों में कोई लक्ष्य हासिल नहीं होता, बल्कि देश से बाहर बैठी ताकतों को अपने खेल खेलने का मंच मिल जाता है।'
