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3 नए आपराधिक कानूनों पर विपक्ष को ऐतराज, जानिए मन में क्यों है शंका और क्या हैं सवाल

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 22, 2023, 12:13 PM IST

Three New Criminal Laws: राज्यसभा से तीन नए आपराधिक विधेयकों के पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसकी सराहना की और देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल बताया। उन्होंने कहा कि जनसेवा और कल्याण पर केन्द्रित ये कानून नए युग की शुरुआत के प्रतीक हैं।

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तीन नए आपराधिक कानून गुरुवार को राज्यसभा से हुए पारित।

Photo : PTI

Three New Criminal Laws: संसद के दोनों सदनों से तीन नए आपराधिक विधेयक पारित हो गए हैं। ये तीनों विधेयक भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी),1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के स्थान पर लाए गए। लोकसभा के बाद गुरुवार को ये तीनों कानून राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हो गए। पुराने आपराधिक कानूनों की जगह लेने वाले इन तीनों विधेयकों के नाम भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) विधेयक-2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) विधेयक-2023 और भारतीय साक्ष्य (बीएस) विधेयक-2023 हैं।

आपराधिक न्याय प्रक्रिया में एक नई शुरुआत-शाह

औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों में आमूल-चूल बदलाव करने के साथ ही आतंकवाद, ‘लिंचिंग’ और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधों के लिए सजा को और अधिक कठोर बनाने के प्रावधान इन विधेयकों में किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि ये विधेयक संसद से पारित होने के बाद भारत के आपराधिक न्याय प्रक्रिया में एक नई शुरुआत होगी जो कि पूर्णतया भारतीय होगी।

कानूनों को शंका की नजर से देख रहा विपक्ष

राज्यसभा से तीन नए आपराधिक विधेयकों के पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसकी सराहना की और देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल बताया। उन्होंने कहा कि जनसेवा और कल्याण पर केन्द्रित ये कानून नए युग की शुरुआत के प्रतीक हैं। हालांकि, विपक्ष इन कानूनों को शंका की नजर से देख रहा है। विपक्ष को लगता है कि ये कानून सरकार को बेलगाम एवं अथाह शक्तियां दे देंगे।

कानूनी तौर पर कई चीजों की स्पष्ट व्याख्या नहीं-अधीर

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कानून में खामियों का जिक्र करते हुए कहा कि 'कहां कौन फंसेगा, किसे कितनी सजा मिलेगी...कानूनी तौर पर इसकी कोई व्याख्या नहीं है। सरकार अंधे युग में डालने की कोशिश कर रही है।' कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दावा किया कि इन विधेयकों के बारे में विपक्ष के साथ कोई चर्चा नहीं की गई। चर्चा के बगैर पुराने कानूनों को खत्म कर दिया गया।

कानून देश को 'पुलिस स्टेट' में बदल देंगे-मनीष तिवारी

सरकार जहां इन कानूनों को गुलामी की मानसिकता से प्रस्थान बता रही है। तो वहीं विपक्ष के मन में कई तरह के सवाल और शंका है। विपक्ष को लगता है कि कानून के प्रावधानों का गलत इस्तेमाल हो सकता है। सरकार और विपक्ष के अपने-अपने तर्क, दावे और दलीलें हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि 'सरकार ने संसद को अवैध कर दिया है। तानाशाही वाले कानूनों पारित किए गए हैं। ये कानून देश को एक 'पुलिस स्टेट' में बदल देंगे। एआईएमआईएम और अकाली दल ने भी इन तीनों नए आपराधिक विधेयकों का विरोध किया। हरसिमरत कौर ने कहा कि उन्हें 40 साल बाद भी न्याय नहीं मिला।

धारा 187 (3) को लेकर भी मन में सवाल

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की कुछ धाराओं पर विपक्ष सवाल उठा रहा है। जैसे कि इसकी धारा 187 (3) मजिस्ट्रेट को यह अधिकार देती है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए वह आरोपी की हिरासत 15 दिनों से बढ़ाकर 60 दिन या 90 दिनों तक कर सकते हैं। विपक्ष को लगता है कि इस धारा का गलत इस्तेमाल हो सकता है। हिरासत में आरोपी को ज्यादा दिनों तक रखकर उसे शारीरिक यातनाएं दी जा सकती हैं। उसे मानसिक रूप से परेशान किया जा सकता है।

धारा 195 (डी) के गलत इस्तेमाल की आशंका

इसी तरह से यदि कोई व्यक्ति देश की सुरक्षा, एकता एवं संप्रभुता को खतरे में डालने के लिए गलत सूचना अथवा गुमराह करने वाली जानकारी देता है तो उसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 195 (डी) के तहत तीन साल की सजा अथवा जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है। विपक्ष को लगता है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 195 (डी) का भी गलत इस्तेमाल हो सकता है। विपक्षी नेताओं को लगता है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हो सकता है क्योंकि इसकी भाषा स्पष्ट और साफ नहीं है।

आईपीसी की धारा-377 को पूरी तरह से हटाने का प्रस्ताव

यही नहीं भारतीय न्याय संहिता में आईपीसी की धारा-377 को पूरी तरह से हटाने का प्रस्ताव है। धारा 377 अप्राकृतिक शीरीरिक संबंधों को दंडित करती है। नए कानून से कूकृत्य करने एवं पुरुषों के साथ सेक्स करने वालों को सजा न मिलने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा विपक्ष का दावा है कि कानूनों में आतंकवाद को परिभाषित करने के लिए विवादास्पद गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) को आधार बनाया गया है।

'बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने पाएंगे नए कानून'

लोकसभा में कानूनों की कथित खामियों की ओर इशारा करते हुए एआईएमआईएम के मुखिया ओवैसी ने कहा कि नए कानून से नियम तोड़कर काम करने वाले व्यवसायी या कारोबारियों पर कानूनी शिकंजा कमजोर पड़ सकता है। ओवैसी ने दावा किया कि नए कानून बड़े कारोबारियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं। विपक्ष का दावा है कि नए विधेयक केंद्र सरकार को बेलगाम ताकत देंगे और भारत को एक 'पुलिस स्टेट' में बदल देंगे। इसके लिए भी इन कानूनों की आलोचना हो रही है।

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