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'राज्यपाल के बेटे ने मुझे थप्पड़ मारा, लात मारी...' जानें क्या है सारा विवाद; जिसमें फंसे रघुवर दास के पुत्र

Odisha Politics: ओडिशा राजभवन के अधिकारी पर 'हमले' को लेकर विपक्ष ने ओडिशा के राज्यपाल के बेटे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। रघुवर दास के बेटे ललित कुमार पर राजभवन के सहायक अनुभाग अधिकारी बैकुंठ प्रधान ने शुक्रवार को ये आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने 5 साथियों के साथ उनसे मारपीट की थी।

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रघुवर दास के बेटे पर गंभीर आरोप।

Photo : Times Now Digital

Odisha Raj Bhawan Controversy: बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस समेत ओडिशा के विपक्षी दलों ने पुरी में राजभवन के एक सहायक अनुभाग अधिकारी पर कथित हमला को लेकर राज्यपाल रघुवर दास के बेटे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। राजभवन के सहायक अनुभाग अधिकारी बैकुंठ प्रधान ने शुक्रवार को दावा किया था कि सात जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के निरीक्षण के दौरान दास के बेटे ललित कुमार और उनके (कुमार के) पांच साथियों ने उनके साथ मारपीट की थी।

ललित कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग हुई तेज

शनिवार को यहां राजभवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की युवा शाखा एवं छात्र शाखा एनएसयूआई ने मांग की कि कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई में देरी की आलोचना की और कुमार की गिरफ्तारी तक प्रदर्शन जारी रखने का निश्चय किया। पुलिस ने बाद में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया।

'निजी सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर किया हमला'

एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष याशिर नवाज ने कहा, 'राज्यपाल के बेटे ने अपने दोस्तों और निजी सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर एक अधिकारी पर हमला किया। छह दिन गुजर गये लेकिन कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है। वरिष्ठ कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बाहिनीपति ने कुमार की गिरफ्तारी में रूकावट डालने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप किये जाने का आरोप लगाया और तत्काल कार्रवाई पर जोर दिया।

पुलिस पर बीजद ने उठाए गंभीर सवाल

बीजद के प्रताप केशारी देब ने भी इस घटना की निंदा की और पुलिस की ‘निष्क्रियता’ पर सवाल उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन माझी से इंसाफ सुनिश्चित करने की अपील की। देब ने कहा, 'प्रधान भले ही निचले स्तर के कर्मी हों लेकिन यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है। एक सरकारी अधिकारी के प्रति राज्यपाल के बेटे का आचरण निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।' बीजद नेता ने कहा, 'गृह और सामान्य प्रशासन विभागों का प्रभार भी संभाल रहे मुख्यमंत्री ने गरीबों और आम लोगों के लिए इंसाफ सुनिश्चित करने पर लगातार बल दिया है। लेकिन अब इस मामले में न्याय देने की सरकार की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।'

ललित कुमार के लिए क्या बोलीं प्रधान की पत्नी?

प्रधान की पत्नी सयोज ने आरोप लगाया कि परिवहन के इंतजाम से असंतुष्ट कुमार ने उनके पति को निशाना बनाया। उन्होंने उनके पति की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं किये जाने पर अपनी निराशा जतायी एवं इंसाफ की मांग की। उन्होंने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया, 'सात जुलाई की रात को जब प्रधान अपने कार्यालय में थे, तब कुमार और उनके साथी उन्हें जबरन अपने कमरे में ले गए और उन पर हमला किया।'

'मुझे थप्पड़ मारा, शरीर पर जहां-तहां लात मारी'

जब सयोज से इस घटना की वजह के बारे पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'राज्यपाल के बेटे परेशान थे क्योंकि मेरे पति ने उन्हें लाने के लिए लक्जरी (शानदार) गाड़ी का इंतजाम नहीं किया था।' राज्यपाल के प्रधान सचिव से की गयी अपनी शिकायत में बैकुंठ प्रधान ने उनके साथ मारपीट का विस्तार से ब्योरा दिया एवं यह भी कहा कि इस घटना के दौरान कुमार ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी कथित रूप से दी। प्रधान ने कहा, 'उन्होंने मुझे थप्पड़ मारा...शरीर पर जहां-तहां लात मारी।'

‘ओडिशा सेक्रेटेरियेट सर्विस एसोसिएशन’ ने मुख्यमंत्री से इस मामले में दखल देने की अपील की है लेकिन अब तक न तो कुमार ने और न ही राज्यपाल कार्यालय ने इन आरोपों के संबंध में कोई बयान जारी किया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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