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ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ रोका गया है, अगर कोई आतंकी हमला हुआ तो फिर से शुरू होगा, राजनाथ की पाकिस्तान को दो टूक

राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह एक द्विपक्षीय मामला है और कोई तीसरा पक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

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राजनाथ ने पाकिस्तान को चेताया (File photo: PTI)

Rajnath Singh Warns Pakistan - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेताते हुए स्पष्ट किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के कारण नहीं हुआ था। उन्होंने दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर को सिर्फ रोका गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर तब रोका गया जब पाकिस्तान ने बार-बार युद्ध विराम का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, यह विराम है, अंत नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी आतंकवादी हमले की स्थिति में, ऑपरेशन सिंदूर फिर से शुरू होगा। वह बुधवार को यहाँ 78वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह में बोल रहे थे।

इशाक डार के बयान का दिया हवाला

राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह एक द्विपक्षीय मामला है और कोई तीसरा पक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकता। ऑपरेशन सिंदूर के कारण आतंकवादियों को हुए नुकसान का जिक्र करते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर ने स्वीकार किया कि बहावलपुर पर हमले में खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर के परिवार के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे।

कोई भी ताकत भारत को चुनौती नहीं दे सकती

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत मजबूत हुआ है और कोई भी ताकत भारत को चुनौती देने का साहस नहीं कर सकती। पिछले 11 वर्षों में मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया को बार-बार यह साबित किया है कि हमारा धैर्य ही हमारी ताकत है और हमारे धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। चाहे 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक हो, 2019 का बालाकोट हवाई हमला हो या 2025 का ऑपरेशन सिंदूर - भारत ने साबित कर दिया है कि जो लोग संवाद, शांति और सद्भावना की भाषा नहीं समझते, हम उन्हें उनकी समझ में आने वाली भाषा में जवाब देना जानते हैं।

रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्पष्ट कर दिया था कि राज्यों का मुद्दा एक आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उस समय का भारत नया-नया आजाद हुआ था, विभाजन के दर्द से उबर रहा था, और उसके पास संसाधन कम थे, फिर भी उसने किसी भी ताकत को अपने आंतरिक मामलों में दखल देने की इजाजत नहीं दी।

आज का भारत पूरी तरह बदल चुका है

उन्होंने कहा, आज का भारत जब पूरी तरह बदल चुका है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, तो कोई भी देश यह कैसे सोच सकता है कि वह भारत पर अपनी शर्तें थोप सकता है। ऑपरेशन सिंदूर इसका सबसे बड़ा सबूत है। हमारी सतर्क सेना ने दुश्मन को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया। यह स्पष्ट करते हुए कि आज का भारत किसी के द्वारा निर्देशित नहीं किया जा सकता, उन्होंने कहा कि भारत अपनी पटकथा खुद लिखता है।

रजाकारों का अत्याचार याद दिलाया

राजनाथ सिंह ने हैदराबाद रियासत के निजाम को आत्मसमर्पण कराकर भारतीय संघ में शामिल कराने के सरदार पटेल के कदम और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमलों पर भारत की प्रतिक्रिया के बीच तुलना की। उन्होंने कहा कि तत्कालीन हैदराबाद रियासत में रजाकारों द्वारा किए गए अत्याचार पहलगाम की घटना जैसे थे, जहां आतंकवादियों ने लोगों का धर्म पूछकर उनकी हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा, पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला भी रजाकारों की तरह ही भारत के सामाजिक सद्भाव पर प्रहार था। जैसे 1948 में सरदार पटेल के दृढ़ संकल्प ने रजाकारों की साजिश को नाकाम कर दिया था, वैसे ही आज पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और उसके एजेंट नाकाम हो गए।

भारत ने ऑपरेशन पोलो शुरू किया था

उन्होंने याद दिलाया कि सरदार पटेल के नेतृत्व में भारत ने ऑपरेशन पोलो शुरू किया था और 17 सितंबर उस ऑपरेशन की विजय वर्षगांठ है। 17 सितंबर सिर्फ एक तारीख़ या दिन नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रतीक है कि भारत की अखंडता और एकता के हर दुश्मन को हार का ही सामना करना पड़ेगा। सरदार पटेल ने अहंकारी निजाम, उसके चालाक सलाहकारों और उसकी खूनी रजाकार सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। हार के बाद, निजाम को भारत में विलय करना पड़ा, रजाकारों से संबंध तोड़ने पड़े, संयुक्त राष्ट्र में की गई शिकायत वापस लेनी पड़ी और लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्वीकार करना पड़ा। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अफसोस की बात है कि आजादी के सात दशकों बाद भी इस ऐतिहासिक घटना को याद रखने और उसे उचित सम्मान देने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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