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ऑपरेशन चंदा चोरी में आया नया मोड़: कैसे चल रहा था नेटवर्क? TIMES NOW के स्टिंग में मास्टरमाइंड का पर्दाफाश

Ram Mandir Donation Sting Operation: राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर TIMES NOW ने अपनी तीन भागों की विशेष जांच 'ऑपरेशन चंदा चोरी' प्रसारित की है। इसके जरिए राम मंदिर ट्रस्ट की दान व्यवस्था को लेकर कई गंभीर खुलासे किए।

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टाइम्स नाउ के स्टिंग में मास्टरमाइंड का पर्दाफाश (फोटो साभार: AI)

Photo : Times Now Digital

Ram Mandir Donation Sting Operation: राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर TIMES NOW ने अपनी तीन भागों की विशेष जांच 'ऑपरेशन चंदा चोरी' प्रसारित की है। इसके जरिए राम मंदिर ट्रस्ट की दान व्यवस्था को लेकर कई गंभीर खुलासे किए। स्टिंग आपरेशन में सामने आया कि चंपत राय के सहयोगियों ने दान सीधे उन तक पहुंचाने, सीसीटीवी कैमरों से बचकर दान देने की व्यवस्था करने और बिना बिल के सोना-चांदी स्वीकार करने की बात कही।

इस स्टिंग में कैमरे पर एक व्हिसलब्लोअर सामने आया, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त राम मंदिर ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास का एक करीबी सहयोगी है। उसने मंदिर में चढ़ाए जाने वाले सोना, चांदी और अन्य सामग्री के दान की कथित हेराफेरी के एक संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया।

इस जांच में ट्रस्ट प्रशासन से जुड़े कुछ वरिष्ठ लोगों के नाम सामने आए हैं और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में कथित तौर पर गहराई तक पैठ बना चुके 'कमीशन कल्चर' का भंडाफोड़ हुआ है।

कर्नाटक गोल्ड रूट

व्हिसलब्लोअर ने गोपाल राव नामक व्यक्ति की पहचान की। जिसे कर्नाटक से लाया गया था, जो इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। व्हिसलब्लोअर के अनुसार, गोपाल राव ने खुद कर्मचारियों को चोरी करने के तरीके सिखाए और बाद में अपने भतीजे समेत 200 बाहरी लोगों को इस कथित नेटवर्क में शामिल किया।

SIT की जांच में सोना और चांदी चुराने के बेहद शातिर तरीके का पता चला है, जिसे 'प्रोसेसिंग' की आड़ में अंजाम दिया जाता था:

वाउचर लूपहोल: मंदिर में चढ़ाए गए सोने और चांदी को अयोध्या, फैजाबाद या लखनऊ के स्थानीय ज्वैलर्स के पास भेजने के बजाय ट्रेनों के जरिए कर्नाटक ले जाया जाता था, जहां उन्हें पिघलाया जाता था। परिवहन के दौरान आधिकारिक वाउचर में वजन कम दर्ज किया जाता था। उदाहरण के तौर पर, यदि 26 किलोग्राम सोना भेजा जाता, तो वाउचर में महज 25 किलोग्राम का जिक्र होता। यदि रास्ते में जांच होती तो वाउचर दिखा दिया जाता और यदि जांच नहीं होती तो अतिरिक्त एक किलो सोना कथित तौर पर हड़प लिया जाता था।

चार्टर्ड उड़ानें: जहां भारी कीमती धातुएं ट्रेन से भेजी जाती थीं, वहीं इस कथित नेटवर्क से जुड़े लोग कमर्शियल और चार्टर्ड उड़ानों से यात्रा करते थे। रिपोर्ट के मुताबिक, गोपाल राव ने एक वर्ष में करीब 50 हवाई यात्राएं कीं, जिनका खर्च इसी नेटवर्क से उठाया गया।

कर्मचारियों की जैकेट भी कर दी गोल

स्टिंग में आगे आरोप लगाया गया कि सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार ने रोज़ाना के कामों को प्रभावित किया, जिसमें सहयोगी ने सीधे तौर पर कैमरे पर कहा, ''हर किसी को कमीशन मिलता था'' और यह भुगतान हर माह किया जाता था।

इसके अलावा, जांच में सामग्री के रूप में मिले दान के गबन का भी खुलासा हुआ। मुंबई के एक दानदाता ने मंदिर के जरूरतमंद कर्मचारियों के लिए दो ट्रक भरकर सर्दियों के जैकेट भेजे थे। आरोप है कि इस पूरी खेप को बीच में ही गायब कर दिया गया। कर्मचारियों तक महज 40 जैकेट ही पहुंचे, जबकि बाकी जैकेटों को कथित तौर पर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा के निजी आवास भेजा गया और बाद में बाजार में अवैध रूप से बेच दिया गया।

ट्रस्टियों को अंधेरे में रखा

व्हिसलब्लोअर ने दावा किया कि इस कथित नेटवर्क को बचाए रखने के लिए ट्रस्ट के कुछ प्रमुख सदस्यों को जानबूझकर अहम जानकारियों से दूर रखा गया। उसके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास तक भी कई जानकारियां नहीं पहुंचने दी गईं।

जांच के मुताबिक, पिछले सात-आठ महीनों में महंत दिनेंद्र दास अधिक सक्रिय हुए, तो सिंडिकेट के लोग घबरा गए। ऐसे में उन लोगों ने जानबूझकर उनके निरीक्षण और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात में प्रशासनिक बाधाएं खड़ी कीं, ताकि कथित नेटवर्क पर निगरानी न बढ़ सके। ऐसा इसलिए भी था, क्योंकि सिंडिकेट के लोगों को डर था कि सीधे तौर पर निरीक्षण से उनके खेल का भंडाफोड़ हो सकता है।

स्टिंग में सामने आईं चौंका देने वाली बातें

टाइम्स नाउ की S.I.T ने खुद को कानपुर का संपन्न दानदाता बताकर राम जन्मभूमि ट्रस्ट गेस्ट हाउस में एंट्री की और छिपे हुए कैमरों और नकली सोने के आभूषणों के साथ किए गए इस स्टिंग में कई गंभीर आरोप लगाए गए।

पर्दे के पीछे से संचालन: स्टिंग में खुलासा हुआ कि सार्वजनिक रूप से सक्रिय न दिखने के बावजूद महासचिव चंपत राय गेस्ट हाउस से ट्रस्ट के कामकाज का संचालन कर रहे हैं और करीबी सहयोगी अनिल मिश्रा के साथ बैठकें कर रहे हैं।

मूल बिल के बिना सोना-चांदी स्वीकार: स्टिंग में सामने आया कि ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने कहा कि सोने के दान के लिए मूल खरीद बिल जरूरी नहीं है। साथ ही जांच टीम को बताया कि डुप्लीकेट बिल या अन्य दस्तावेज भी मान्य होंगे।

दानदाताओं से अधिकार छोड़ने का कथित आग्रह: दानदाताओं से एक लिखित घोषणा ली जाती थी, जिसके बाद वे अपने दान के उपयोग या भविष्य में उसकी स्थिति को लेकर कोई सवाल नहीं उठा सकते थे।

सीसीटीवी निगरानी से समझौता: स्टिंग में यह भी आरोप लगाया गया कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों ने जांच टीम को भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर सीसीटीवी कैमरों और निगरानी व्यवस्था को भी "मैनेज" किया जा सकता है।

जवाबदेही की मांग तेज

इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद महासचिव चंपत राय, कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन खुलासों के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की दान व्यवस्था की निष्पक्ष जांच और व्यापक सुधार की मांग तेज हो गई है।

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