I-PAC vs ED : ईडी की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को जारी किया नोटिस, 2 हफ्ते में जवाब मांगा, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
- Reported by: गौरव श्रीवास्तव
- Updated Jan 15, 2026, 03:00 PM IST
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलीलें पेश कीं और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन पर गंभी आरोप लगाए। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी एजेंसी को चुनावी कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
ईडी की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई। तस्वीर-PTI
I-PAC vs ED : कोलकाता में हुई I-PAC के रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अर्जी पर सुनवाई करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने जवाब देने के लिए ममता सरकार को दो सप्ताह का वक्त दिया है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलीलें पेश कीं और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन पर गंभी आरोप लगाए। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी एजेंसी को चुनावी कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल पुलिस को CCTV फुटेज संरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
आज की अर्जी में ED ने उठाए हैं कई गंभीर मुद्दे-SC
कोर्ट ने कहा कि हालांकि, यदि कोई केंद्रीय एजेंसी किसी गंभीर अपराध की जांच के लिए 'बोना फायड' तरीके से कार्य कर रही है, तो यह प्रश्न उठता है कि क्या केवल राजनीतिक दल की गतिविधियों की आड़ लेकर जांच एजेंसियों को अपने वैधानिक जांच अधिकारों के प्रयोग से रोका जा सकता है? कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया वह मानती है कि ED ने अपनी आज की अर्जी में कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं। इसमें बताया गया कि ED और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों के काम किस तरह से राज्य सरकार ने बाधा डाली। हालांकि ED के अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज FIR पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 3 फरवरी को होगी।
ईडी की नई अर्जी पर भी ममता सरकार से मांगा जवाब
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नई अर्जी पर भी सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार से जवाब मांगा है। ईडी ने नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें डीजीपी राजीव कुमार भी शामिल हैं, को निलंबित किए जाने की मांग की है। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की।
वरिष्ठ वकील सिंघवी-सिब्बल के दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में टीएमसी, डीजीपी और कोलकाता कमिश्नर की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों को रिकॉर्ड में लिया। साथ ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ED की दलीलों पर आपत्ति भी जताई। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जब यह मामला पहले से ही हाईकोर्ट में लंबित है, तो इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
'रेड से पहले ED ने स्थानीय पुलिस को सूचित नहीं किया'
सिब्बल ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री, विशेष रूप से पंचनामा पर गौर करने से स्पष्ट होता है कि तलाशी और जब्ती के दौरान कोई भी आपत्तिजनक या ठोस सामग्री बरामद नहीं हुई। यह भी तर्क दिया गया कि 8 जनवरी की सुबह तलाशी शुरू करने से पहले ईडी ने स्थानीय पुलिस को सूचित नहीं किया था। सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उस परिसर में मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की चेयरपर्सन के तौर पर गई थीं। उनके अनुसार, उन्हें यह सूचना मिली थी कि पार्टी से संबंधित सामग्री को वहां से ले जाया जा रहा है। सिब्बल ने कहा कि आई-पैक (IPAC) से जुड़े दस्तावेज केवल चुनावी सामग्री थे, जिनसे ईडी का कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने यह भी दलील दी कि ममता बनर्जी टीएमसी की चेयरपर्सन होने के साथ-साथ जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति (जेड प्रोटेक्टी) हैं, इसलिए जब वह प्रतीक जैन के परिसर में गईं, तो डीजीपी का उनके साथ मौजूद रहना उनका कर्तव्य था।
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