Father Daughters Life Saved in Odisha Train Accident: कहते हैं कि ईश्वर की माया अपरंपार है, इसका साक्षात दर्शन उस वक्त हुआ जब ओडिशा के बालासोर में कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे (Coromandal Express Train Accident) में एक पिता और उसकी आठ साल की बेटी की जान कुछ इस तरह से बची कि लोग हैरत मान रहे हैं, दरअसल बेटी ने सफर में जिद की कि उसे विंडो सीट (Window Seat) पर बैठना है, इस जिद ने उन दोनों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।
बताते हैं कि दरअसल पिता-पुत्री की जोड़ी खड़गपुर से ट्रेन में सवार हुई और उन्हें कटक में उतरना था वहां एक डॉक्टर के साथ अपॉइंटमेंट था, सफर में उन्हें विंडो सीट नहीं मिली थी जिसके चलते बेटी ने जिद की कि उसे विंडो सीट पर ही बैठना है, इसके बाद पिता ने अपनी रिजर्व सीट से तीन बोगी दूर दूसरी सीट खोजी।
बेटी को खिड़की के पास वाली सीट पर बैठना था
उनकी सीट थर्ड एसी कोच में रिजर्व थी लेकिन उनकी सीट विंडो के पास नहीं थी मगर बेटी को खिड़की के पास वाली सीट पर बैठना था, पिता के समझाने पर भी बेटी नहीं मानी, फिर मजबूरन पिता ने टीसी से सीट बदलने की रिक्वेस्ट की तो उसने कहा कि से म्यूचुअल सीट एक्सचेंज कर लें, इसपर वो दूसरे कोच में गए और दो लोगों से अनुरोध किया तो वे सहमत हो गए और वो उनकी सीट पर बैठ गए और वो उन दो लोगों की सीट पर बैठे जोकि उनकी सीट पर तीन बोगी दूर थी।
कुछ समय बाद ट्रेन में भयानक त्रासदी हुई
सीटों को एक्सचेंज करने के कुछ समय बाद ट्रेन में भयानक त्रासदी हुई, मगर जिस कोच में पिता-पुत्री यात्रा कर रहे थे, उसे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, उसके उलट जहां उनकी सीटें रिजर्व थीं, जहां वो दो लोग गए थे वो कई हिस्से में बंट गई और इसमें कई लोगों की मौत हो गई।
