नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजित डोभाल को लगता था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से गुजरात के पूर्व सीएम नरेंद्र मोदी के बजाय सुपर सीनियर नेता लाल कृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री बनेंगे। वह यह भी मानते थे कि एलके कश्मीर की समस्या का हल निकालने में देश की मदद कर सकते हैं। वह (एनएसए) तब टॉप अफसरों को उनसे भेंट करने की सलाह भी देते थे, जबकि आडवाणी भी उन्हें खासा पसंद करते थे। वह मानते थे कि डोभाल हिंदुस्तान के जबरदस्त जासूस हैं। यही वजह थी कि दोनों के बीच अच्छे रिश्ते भी रहे।
ये सारी बातें रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के पूर्व चीफ अमरजीत सिंह दुलत ने 'दि वायर' से खास बातचीत के दौरान बताईं। डोभाल के बारे में वह बोले- लगता था कि महत्वाकांक्षी वह माथे पर लिखवाकर लाए हों। उनमें पावर को भांप लेने या पहचानने की कमाल की क्षमता थी। वह सिर्फ साल 2014 का इंतजार कर रहे थे। डोभाल मानकर चलते थे कि हो सकता है बीजेपी की ओर से आडवाणी पीएम बन जाएं।
अक्सर डोभाल दुलत को आडवाणी से मिलने के लिए कहते थे। उन्होंने इस बारे में बताया- मैं जब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में था, तब डोभाल मुझसे कहा करते थे कि आप आडवाणी से क्यों नहीं भेंट करते हैं? कश्मीर मसले पर समस्या का समाधान करने में हमारी मदद कर सकते हैं। हालांकि, दुलत तब अटल बिहारी वाजपेयी के पक्ष में थे।
