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LK Advani के तब PM बनने की आस लगाए बैठे थे Narendra Modi के 'टास्कमास्टर'- पूर्व RAW चीफ का खुलासा

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Dec 21, 2022, 07:06 AM IST

रॉ के पूर्व चीफ एस एस दुलत ने एनएसए अजित डोवाल को लेकर हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कई खुलासे किए। A Life in the Shadows नाम से उनकी एक किताब भी आई है, जिसमें उन्होंने डोवाल पर पूरा एक चैप्टर लिखा है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के सीनियर नेता लाल कृष्ण आडवाणी। (फाइल)

Photo : IANS

नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजित डोभाल को लगता था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से गुजरात के पूर्व सीएम नरेंद्र मोदी के बजाय सुपर सीनियर नेता लाल कृष्ण आडवाणी प्रधानमंत्री बनेंगे। वह यह भी मानते थे कि एलके कश्मीर की समस्या का हल निकालने में देश की मदद कर सकते हैं। वह (एनएसए) तब टॉप अफसरों को उनसे भेंट करने की सलाह भी देते थे, जबकि आडवाणी भी उन्हें खासा पसंद करते थे। वह मानते थे कि डोभाल हिंदुस्तान के जबरदस्त जासूस हैं। यही वजह थी कि दोनों के बीच अच्छे रिश्ते भी रहे।

ये सारी बातें रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के पूर्व चीफ अमरजीत सिंह दुलत ने 'दि वायर' से खास बातचीत के दौरान बताईं। डोभाल के बारे में वह बोले- लगता था कि महत्वाकांक्षी वह माथे पर लिखवाकर लाए हों। उनमें पावर को भांप लेने या पहचानने की कमाल की क्षमता थी। वह सिर्फ साल 2014 का इंतजार कर रहे थे। डोभाल मानकर चलते थे कि हो सकता है बीजेपी की ओर से आडवाणी पीएम बन जाएं।

अक्सर डोभाल दुलत को आडवाणी से मिलने के लिए कहते थे। उन्होंने इस बारे में बताया- मैं जब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में था, तब डोभाल मुझसे कहा करते थे कि आप आडवाणी से क्यों नहीं भेंट करते हैं? कश्मीर मसले पर समस्या का समाधान करने में हमारी मदद कर सकते हैं। हालांकि, दुलत तब अटल बिहारी वाजपेयी के पक्ष में थे।

कौन हैं डोवाल? एक नजर में जानिए

77 साल के कीर्ति चक्र से सम्मानित डोवाल आईपीएस कैडर के सेवानिवृत्त सिविल सर्वेंट हैं। वह उत्तराखंड के गढ़वाल जिला से ताल्लुक रखते हैं। भीमराव अंबेडकर विवि, नेशनल डिफेंस कॉलेज और राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल से उन्होंने पढ़ाई की है, जबकि फिलहाल वह पीएम के पांचवें और मौजूदा एनएसए हैं। उनकी जासूसी के किस्से देश ही नहीं बल्कि दुनिया के और मुल्कों में मशहूर हैं। यही वजह है कि कुछ लोग उन्हें भारत का जेम्स बॉन्ड भी कहते हैं।
अभिषेक गुप्ता
अभिषेक गुप्ताauthor

छोटे शहर से, पर सपने बड़े-बड़े. किस्सागो ऐसे जो कहने-बताने और सुनाने को बेताब. कंटेंट क्रिएशन के साथ नजर से खबर पकड़ने में पारंगत और "मीडिया की मंडी" में लगभग आठ साल का अनुभव. न्यूज, सिनेमा, बाइक्स और घूमने में दिलचस्पी.

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