तड़पता रहा युवराज और मूकदर्शन बना रहा सिस्टम; कैसे स्थानीयों ने खोल दी नोएडा प्रशासन की पोल?
- Edited by: Piyush Kumar
- Updated Jan 18, 2026, 07:24 PM IST
Yuvraj Mehta Car Accident Greater Noida: नोएडा सेक्टर-150 में सिस्टम की लापरवाही और जमे पानी के कारण 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज की मौत हो गई। पिता के सामने मदद के लिए तड़पते रहे युवराज, लेकिन प्रशासन और पुलिस समय पर नहीं पहुँची। घटना ने स्थानीय सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुरुग्राम से घर लौट रहे 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज की दर्दनाक मौत।(फोटो सोर्स: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल)
Yuvraj Mehta Car Accident Greater Noida: अंधेरी सड़क, जमा पानी और बेजान सिस्टम… यही वो खामोश हत्यारे बने, जिन्होंने नोएडा के सेक्टर-150 में एक होनहार युवा की जिंदगी छीन ली। 27 साल का इंजीनियर युवराज मेहता डेढ़ से दो घंटे तक मौत से जूझता रहा, मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन न पुलिस आई, न प्रशासन जागा। सबसे दर्दनाक तस्वीर यह थी कि पिता सामने खड़े होकर अपने बेटे को तड़पते देखते रहे और सिस्टम मूकदर्शक बना रहा।
शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे गुरुग्राम से घर लौट रहे 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज की दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। यह हादसा नोएडा सेक्टर-150 के पास सड़क पर लंबे समय से जमे पानी और शून्य विजिबिलिटी के कारण हुआ।
जानकारी के मुताबिक, युवराज जैसे ही सेक्टर-150 के कट पर पहुंचा, अंधेरे और कोहरे की वजह से सड़क पर भरे गहरे पानी का अंदाजा नहीं लगा सका और कार सहित उसमें सीधे गड्ढें में जा गिरा। हादसे के बाद युवराज करीब डेढ़ से दो घंटे तक मदद के लिए तड़पता रहा, लेकिन न तो पुलिस मौके पर पहुंची और न ही प्रशासन की ओर से कोई सहायता मिली।
सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि युवराज के पिता मौके पर मौजूद थे और अपने बेटे को तड़पते हुए देख रहे थे। वे लगातार मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने बचाने की कोशिश तक नहीं की।
न बैरिकेडिंग, न रिफ्लेटक्ट और न चेतावनी बोर्ड...
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां न तो बैरिकेडिंग की गई थी, न ही रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड या स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था थी। यह वही जगह है जहां 31 दिसंबर को भी एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, लेकिन तब भी नोएडा अथॉरिटी ने कोई सबक नहीं लिया।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने क्या कहा?
घटनास्थल के आसपास कई रिहायशी सोसाइटी हैं। यहां के निवासियों का आरोप है कि वे पिछले कई महीनों से इस खुले नाले और जलभराव की समस्या को लेकर लगातार शिकायतें कर रहे थे।
क्षेत्र के सांसद महेश शर्मा और विधायक तेजपाल सिंह नागर ने भी नोएडा अथॉरिटी को पत्र लिखकर नाले को कवर करने, स्ट्रीट लाइट, स्पीड ब्रेकर और सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की थी। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते नाले को कवर कर दिया जाता और सुरक्षा इंतजाम किए जाते, तो आज युवराज की जान बच सकती थी।
युवराज के पिता ने क्या-क्या कहा?
मृतक इंजीनियर युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता का दर्द अब शब्दों में छलक पड़ा है। उन्होंने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका बेटा करीब दो घंटे तक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहा, मदद के लिए चीखता रहा, लेकिन न तो सिस्टम समय पर हरकत में आया और न ही मौके पर मौजूद लोग उसे बचा सके।राजकुमार मेहता ने कहा, “मेरा बेटा खुद को बचाने की पूरी कोशिश कर रहा था। वह लोगों से मदद की गुहार लगा रहा था, रो रहा था, लेकिन भीड़ में से ज्यादातर लोग सिर्फ खड़े होकर देखते रहे। कुछ लोग वीडियो बना रहे थे। मेरा बेटा करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा।” उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर मौजूद अधिकारी और कर्मचारी उनके बेटे को बचाने में पूरी तरह असमर्थ थे
उन्होंने आगे कहा, “वहां मौजूद अफसरों और स्टाफ के पास न तो गोताखोर थे और न ही कोई जरूरी संसाधन। वे मेरे बेटे को बचाने में सक्षम ही नहीं थे। यह पूरी तरह से प्रशासन की लापरवाही है,” उन्होंने कहा। राजकुमार मेहता ने कहा कि मेरी मांग है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो और वहां ऐसी पुख्ता व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को यह दर्द न झेलना पड़े।”
हादसे की पूरी टाइमलाइन
रात करीब 12:00 बजे
गुड़गांव से घर लौट रहे 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरिका पार्क के पास पहुंचे। घने कोहरे की वजह से सड़क किनारे बने खाली प्लॉट का खुला बेसमेंट नजर नहीं आया। कार संतुलन खो बैठी, नाले की बाउंड्री तोड़ती हुई सीधे बेसमेंट में जा गिरी, जहां करीब 30 फीट तक पानी भरा हुआ था।
रात 12:10 से 12:20 बजे के बीच
युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकलने में कामयाब रहे और जान बचाने के लिए कार की छत पर चढ़ गए। उन्होंने मोबाइल फोन से अपने पिता राजकुमार मेहता को कॉल किया और घबराई हुई आवाज में पूरी स्थिति बताई। फोन पर उन्होंने कहा— “पापा, मुझे बचा लो… मुझे अभी नहीं मरना है।”
रात 12:20 बजे
पिता ने तुरंत डायल-112 पर कॉल कर हादसे की सूचना दी और कुछ ही मिनटों में खुद भी मौके पर पहुंच गए। घटनास्थल युवराज के घर से महज 500 मीटर की दूरी पर था।
रात करीब 12:50 बजे
स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। युवराज की मदद के लिए पुकार सुनाई दे रही थी, लेकिन घना कोहरा और अंधेरा होने के कारण उन्हें देख पाना बेहद मुश्किल था। इस बीच वहां से गुजर रहे एक स्थानीय व्यक्ति मोहिंदर ने साहस दिखाते हुए बर्फीले पानी में छलांग लगाई और करीब 30 मिनट तक युवराज को तलाशने की कोशिश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
रात 1:15 बजे
एसडीआरएफ की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। इस दौरान युवराज लगातार मदद के लिए चिल्लाते रहे। हालांकि, शुरुआती तौर पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को तैरना नहीं आता था, इसलिए क्रेन मंगाई गई। बावजूद इसके, काफी देर तक कोई भी पानी में उतरकर तत्काल रेस्क्यू शुरू नहीं कर पाया।
करीब 80 मिनट बाद
धीरे-धीरे युवराज की आवाज कमजोर पड़ने लगी और फिर पूरी तरह शांत हो गई। कुछ ही देर में कार पूरी तरह पानी में डूब गई और युवराज जिंदगी की जंग हार गए।
सुबह करीब 4:30 बजे
लगभग पांच घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद टीम ने युवराज का शव पानी से बाहर निकाला। चश्मदीदों के मुताबिक, यह मंजर बेहद भयावह और दिल दहला देने वाला था, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को झकझोर कर रख दिया।
कौन थे युवराज मेहता?
27 वर्षीय युवराज मेहता अपने पिता राजकुमार मेहता के साथ ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज गुरुग्राम स्थित एक प्रतिष्ठित कंपनी में ग्राहक डेटा विज्ञान विभाग में कार्यरत थे। उनके पिता भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त निदेशक हैं, जबकि उनकी माता का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था। उनकी बड़ी बहन यूनाइटेड किंगडम में रहती हैं।
शनिवार सुबह पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद युवराज का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव सफीपुर में किया गया। इस दौरान शोक में डूबे पिता, परिवार के सदस्य और करीबी मित्र मौजूद रहे। नम आंखों के बीच युवक को अंतिम विदाई दी गई।
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