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पुरी के जगन्नाथ मंदिर से 70 मोदक की हुई चोरी? कानून मंत्री ने साफ की पूरी तस्वीर

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने स्पष्ट किया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर से मोदक की कोई चोरी नहीं हुई है।

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कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर से मोदक की कोई चोरी नहीं हुई है।

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भुवनेश्वर: ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने स्पष्ट किया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर से मोदक की कोई चोरी नहीं हुई है। इससे पहले सेवायतों के एक वर्ग ने मोदक चोरी होने का आरोप लगाया था।मोदक एक विशेष प्रकार का लड्डू होता है जिसका रथ यात्रा उत्सव से पहले एक अनुष्ठान के तहत मंदिर के देवताओं को भोग लगाया जाता है।

मंत्री ने मंगलवार को कहा कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मंदिर से मोदक की कोई चोरी नहीं हुई है। विवाद सामने आने पर पाधी ने एसजेटीए अधिकारियों को जांच का आदेश दिया, जिसमें पाया गया कि मोदक की कोई चोरी नहीं हुई है।

अनासर' काल के दौरान मंदिर में मोदक की आपूर्ति होती है

वैद्य सेवकों (आयुर्वेदिक चिकित्सकों) का एक समूह भगवान के 'अनासर' काल के दौरान मंदिर में मोदक की आपूर्ति करता है। ऐसा माना जाता है कि ‘अनासर' काल के दौरान देवता बीमार पड़ जाते हैं। यह भी माना जाता है कि मोदक खाने के बाद भगवान ठीक हो जाते हैं।

हलधर दास महापात्रा के दावों से मचा था हड़कंप

विवाद उस समय शुरू हुआ जब भगवान बलभद्र के 'बड़ाग्रही' (अंगरक्षक) हलधर दास महापात्रा ने दावा किया कि कड़ी सुरक्षा में रखे गए 313 'मोदकों' में से 70 गायब हो गए हैं। माना जाता है कि मोदक चोरी होने से उनकी पवित्रता खत्म हो जाती है। उन्होंने एसजेटीए में औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई। पत्रकारों से बात करते हुए पाधी ने भी चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया। (भाषा - इनपुट)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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