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Ajit Doval: 'राष्ट्रीय सुरक्षा में कोई रजत पदक नहीं मिलता या तो आप विजयी होते हैं या पराजित', NSA डोभाल ने क्यों कही यह बात

Ajit Doval: सुरक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को संबोधित करते हुए NSA अजीत डोभाल ने कहा, 'यह एक ऐसा खेल है, जिसमें कोई रजत पदक नहीं मिलता। या तो आप विजयी होते हैं या पराजित।'

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल।

Photo : PTI

Ajit Doval news: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मंगलवार को कहा कि भारत एक 'ऐतिहासिक जागरण' के दौर से गुजर रहा है, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा केवल वर्दी पहने सुरक्षाकर्मियों की नहीं बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी बन गई है। एनएसए (Ajit Doval) ने यह बात मंगलवार को गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (RRU) के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी राष्ट्र की शक्ति का आकलन करते समय उसके लोगों की इच्छाशक्ति को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती है। सुरक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा, 'यह एक ऐसा खेल है, जिसमें कोई रजत पदक नहीं मिलता। या तो आप विजयी होते हैं या पराजित।'

राष्ट्रीय सुरक्षा पूरे राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी-डोभाल

दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हालांकि सैन्य शक्ति जैसे कारक अहम हैं, लेकिन सुरक्षा मामलों में अक्सर लोगों की अंतर्निहित शक्ति ही निर्णायक साबित होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा पूरे राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। डोभाल ने कहा, 'राष्ट्रीय सुरक्षा एक व्यापक, जटिल और बहुआयामी मुद्दा है। इसमें कई घटक शामिल हैं : किसी राष्ट्र की सैन्य शक्ति, तकनीकी दक्षता, प्राकृतिक संसाधन, कूटनीतिक क्षमता और मानव पूंजी।'

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एनएसए ने दिए वैश्विक घटनाक्रमों के उदाहरण

हालांकि, उन्होंने कहा कि इस व्यापक राष्ट्रीय शक्ति का आकलन करते समय राष्ट्र की इच्छाशक्ति और उसके लोगों की अंतर्निहित शक्ति का अंदाजा लगाने में अक्सर गलतियां होती हैं। डोभाल ने इसे समझाने के लिए वैश्विक घटनाक्रमों के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा, 'अगर रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) अफगानिस्तान से (1988-89 में) पीछे हट गया या अगर अमेरिका को वियतनाम से (1970 के दशक में) पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा या अगर अमेरिका अफगानिस्तान में अपने उद्देश्यों को हासिल करने में नाकाम रहा- तो यह सैन्य शक्ति या प्रौद्योगिकी की कमी के कारण नहीं था, बल्कि निर्णायक कारक स्थानीय लोगों का जज्बा एवं प्रतिबद्धता थी, जिसे हम राष्ट्र की इच्छाशक्ति भी कहते हैं।'

    'युद्ध का एकमात्र मकसद दुश्मन का मनोबल तोड़ना'

    एनएसए ने कहा कि युद्ध का एकमात्र मकसद दुश्मन का मनोबल तोड़ना है, ताकि उन्हें आपकी शर्तों पर समझौता स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस शक्ति के निर्माण में नागरिकों की भूमिका बेहद अहम है। डोभाल ने कहा, 'इस इच्छाशक्ति के विकास में आम जनता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, खासतौर पर अपनी सुरक्षा के प्रति उनकी जागरूकता का स्तर।' उन्होंने कहा कि भारत इस सिलसिले में एक बदलाव का गवाह बन रहा है।

    कोई रजत पदक नहीं मिलता-डोभाल

    डोभाल ने इस क्षेत्र में चरित्र और अनुशासन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि "मानसिक शक्ति" और एक टीम के रूप में काम करने की क्षमता उत्कृष्टता हासिल करने के लिए आवश्यक गुण हैं। प्रतिबद्धता को "तीसरा अपरिहार्य तत्व" बताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उच्चतम स्तर की निष्ठा की जरूरत होती है। सुरक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा, "यह एक ऐसा खेल है, जिसमें कोई रजत पदक नहीं मिलता। या तो आप विजयी होते हैं या पराजित। अगर आप जीतते हैं, तो आप इतिहास रचते हैं; लेकिन अगर आप हारते हैं, तो आप इतिहास बन जाते हैं। आपका अस्तित्व ही दांव पर लगा होगा।"

    Alok Rao
    आलोक कुमार रावauthor

    19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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