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मोदी सरनेम मामले में सेशंस कोर्ट से भी राहुल गांधी को राहत नहीं, अब आगे क्या हैं विकल्प

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Apr 20, 2023, 12:31 PM IST

Rahul Gandhi News: सियासत की पटरी से कब किसकी गाड़ी फिसल जाए अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। 2019 मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी की एक टिप्पणी उनके लिए भारी पड़ चुकी है। पहले मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत से झटका और अब सूरत सेशंस कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उनके पास और क्या दूसरे विकल्प हैं, जानना जरूरी है।

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राहुल गांधी

Rahul Gandhi News: मोदी सरनेम मामले(Modi Surname Case) में राहुल गांधी को मार्च से लेकर अप्रैल तक दो बार झटका लग चुका है। पहले मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने उन्हें दो साल की सुनाई और उसका असर यह हुआ की राहुल गांधी सांसदी के लिए अयोग्य हो गए। सजा पर रोक के लिए उन्होंने सेशंस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन सेशंस कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने की अर्जी को खारिज कर दिया। अगर सेशंस कोर्ट से राहत मिली होती तो उनकी सांसदी बहाल हो सकती थी। लेकिन अब उसकी संभावना भी खत्म हो चुकी है। ऐसी सूरत में राहुल गांधी(Rahul Gandhi) के सामने दूसरे विकल्प क्या हैं। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश का कहना है कि पार्टी दूसरे विकल्पों पर विचार करेगी।

दूसरे विकल्पों पर विचार

सेशंस कोर्ट के सामने राहुल गांधी ने दलील पेश की थी कि मोदी सरनेम केस में अधिकतम सजा देने की जरूरत नहीं थी। निष्पक्ष तरीके से ट्रायल नहीं किया गया। मजिस्ट्रेट का फैसला हैरान करने वाला था क्योंकि उन्होंने साक्ष्यों का सही तरह से मुल्यांकन नहीं किया। लेकिन विरोधी पक्ष ने कहा कि राहुल गांधी लगातार अपराध करने वाले शख्स हैं, यही नहीं उन्होंने बयान पर माफी मांगने से भी इनकार कर दिया था।

बीजेपी की प्रतिक्रिया, सत्यमेव जयते

सेशंस कोर्ट के फैसले पर बीजेपी(BJP) की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई। प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि सत्यमेव जयते और पूछा कि क्या कांग्रेस दोबारा से अदालतों पर सवाल उठाएगी। क्या वे अदालत पर सवाल उठाने की जगह अहम को एक किनारे कर ओबीसी समाज से माफी मांगेंगे। वहीं अमित मालवीय ने कहा कि ओबीसी समाज को अपमानित करने के साथ ही उस समाज को चोर कहने वाले राहुल गांधी की अकड़ नहीं गई। जो फैसला आया है वो उनके अहंकार और नजरिए का परिणाम है।

जानकार कहते हैं कि अब ऐसी सूरत में राहुल गांधी की कानूनी टीम के पास उच्च अदालतों का दरवाजा खटखटाने की विकल्प है। लेकिन जिस तरह से दो अदालतों ने उन्हें दोषी माना है उस सूरत में बड़ी अदालत से राहत मिलने की उम्मीद कम है। राजनीतिक जीवन में इस तरह की परिस्थितियों का निर्माण होतका है। आपने देखा होगा कि किस तरह से ऑफिस ऑफ प्राफिट के मसले में सोनिया गांधी जनता के बीच गईं थीं और माहौल को अपने पक्ष में बनाने की कोशिश की थी।

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ललित राय
ललित राय author

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