Womens Quota Bill: कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार करते हुए राष्ट्र के नाम संबोधन को पक्षपातपूर्ण करार दिया और कहा कि यह निराशा से भरे संबोधन से ज्यादा कुछ नहीं है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''किसी मौजूदा प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन उस पद की गरिमा से जुड़ा होता है। इसका उद्देश्य बिना किसी पक्षपात के राष्ट्र के संकल्प और आत्मविश्वास को मजबूत करना होता है, लेकिन आज का बेहद निराशाजनक और पूरी तरह से पक्षपात से भरा भाषण, राष्ट्र के नाम संबोधन की बजाय एक निराशा से भरा संबोधन ज्यादा लगा, जिसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में देना ज़्यादा उचित होता।''
PM मोदी पर बरसे जयराम रमेश
कांग्रेस नेता ने कहा कि कल रात लोकसभा में मिली करारी विधायी हार से विचलित प्रधानमंत्री में अब भी मीडिया का सामना करने की हिम्मत नहीं है। प्रधानमंत्री ने अपने संविधान संशोधन बिल को लोकसभा से पारित न करा पाने के लिए माफी मांगी है, लेकिन वास्तव में उन्हें महिलाओं के नाम पर परिसीमन के एक कुटिल प्रस्ताव को ज़बरदस्ती पारित कराने के कपट से भरे प्रयासों के लिए माफी मांगनी चाहिए थी।
उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे मामले में उनकी नीयत साफ नहीं, स्पष्ट रूप से खोटी है। अगर उनकी नीयत को समझना हो, तो यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023', जो सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पास हो गया था, उसे 30 महीने की देरी के बाद 16 अप्रैल 2026 की देर रात को अधिसूचित क्यों किया गया। उनके जीवन भर के आचरण को देखते हुए, महिला सम्मान की उनकी बातें पूरी तरह से पाखंड लगती हैं।
उन्होंने कहा कि कल लोकसभा में प्रधानमंत्री ने जो करने की कोशिश की, वह हमारे लोकतंत्र और संघीय ढांचे को कमज़ोर करने वाला था। यह वही खतरा था जिसका अंदेशा तब भी जताया गया था, जब उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले '400 पार' का नारा दिया था। संविधान निर्माताओं की विरासत का हवाला देना उनके पाखंड को और स्पष्ट कर देता है।
जयराम रमेश ने कहा, ''प्रधानमंत्री के तमाम हास्यास्पद दावों में एक यह भी था कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जन धन-आधार-मोबाइल और जीएसटी का विरोध किया था, जबकि ये दोनों ही कांग्रेस की देन है। इंदिरा गांधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर सार्वभौमिक बैंकिंग की नींव रखी। आधार योजना को 29 सितंबर, 2010 को महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले से डॉ. मनमोहन सिंह ने शुरू किया था। भारत की डिजिटल क्रांति राजीव गांधी की सोच और प्रयासों से संभव हुई। जीएसटी को भी डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने आगे बढ़ाया था, लेकिन तब गुजरात के एक पूर्व मुख्यमंत्री के विरोध के कारण यह पास नहीं हो सका। उसी मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और मनरेगा का भी विरोध किया था, जो कोविड-19 महामारी के दौरान करोड़ों लोगों के लिए सहारा बने। प्रधानमंत्री को झूठ बोलने की बीमारी है। आज भी उन्होंने यही साबित किया है।''
कांग्रेस ने PM मोदी को दी चुनौती
उन्होंने कहा कि अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण के लिए 'समय का इंतजार' करना होगा, लेकिन महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रधानमंत्री को चुनौती देती है कि वे कल ही संसद में मौजूदा संरचना के तहत ही महिला आरक्षण को लागू करने के लिए विधेयक पेश करें।
