भारत में इन जगहों के ऊपर नहीं उड़ सकता कोई भी विमान, यह 'महल' भी इसमें है शामिल

भारत का हवाई क्षेत्र काफी विशाल है और इससे होकर रोजाना काफी संख्या में विमान गुजरते हैं। पर क्या आपको पता है कि यहां आकाश का हर हिस्सा विमानों की उड़ान के लिए खुला नहीं है। देश में कुछ क्षेत्रों को नो-फ्लाई जोन (No Flying Zones In India) घोषित किया गया है। इसका मतलब यह है कि इसके उपर से विमानों को उड़ान भरने की मनाही है यानी यहां से होकर आकाश में कोई भी विमान नहीं गुजर सकता। अगर कोई अनाधिकृत व्यक्ति या संस्था नो-फ्लाई जोन में विमान, हेलिकॉप्टर, ड्रोन आदि उड़ाने की कोशिश करती है तो उसे हवाई क्षेत्र नियंत्रक या वायु सेना द्वारा रोक दिया जाता है। जानिए नो-फ्लाइंग जोन के बारे में और जानकारी

Authored by: रवि वैश्यUpdated Dec 7 2025, 10:14 IST
​आखिर क्यों बनाया जाता है नो फ्लाइंग जोन?01 / 07

​आखिर क्यों बनाया जाता है नो फ्लाइंग जोन?

बता दें देश में कुछ स्थान ऐसे हैं जिनकी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्कता बरती जाती है ताकि यह स्थान सेफ रहें। इसके पीछे का कारणों पर गौर करें तो यह-सुरक्षा कारणों, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा प्रतिष्ठान, हेरिटेज संरक्षण, या अन्य संवेदनशील गतिविधियों के लिए है। इसलिए वहां पर नो-फ्लाई जोन (India’s No Flying Zones) घोषित किया गया है। आमतौर पर 'नो-फ्लाई जोन' ऐसा हवाई क्षेत्र (Airspace) होता है जहां किसी प्रकार के हवाई वाहन जैसे- विमान, हेलिकॉप्टर, या ड्रोन को उड़ान भरने या उड़ने की अनुमति नहीं होती। जानिए भारत में ऐसे स्थान कौन से हैं।

​राष्ट्रपति भवन और सेंट्रल दिल्ली हैं No Flying Zone02 / 07

​राष्ट्रपति भवन और सेंट्रल दिल्ली हैं No Flying Zone

भारत में राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और प्रधानमंत्री आवास के ऊपर का हवाई क्षेत्र स्थायी रूप से प्रतिबंधित है। संसद भवन प्रधानमंत्री आवास और मंत्रालयों के दफ्तर और कई अहम सुरक्षा से जुड़ी जगहें हैं जिसके कारण ही इस इलाके के ऊपर उड़ान भरने पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी अनधिकृत विमान पर तत्काल सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

​भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC),मुंबई03 / 07

​भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC),मुंबई

बार्क भारत का परमाणु अनुसंधान एवं विकास केंद्र है। महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और किसी भी संभावित हवाई खतरे को रोकने के लिए इसका हवाई क्षेत्र स्थायी रूप से प्रतिबंधित है। बता दें कि यहां ड्रोन उड़ाने पर भी सख्त प्रतिबंध है।

​तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश04 / 07

​तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश

भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक तिरुमाला मंदिर और उसके आसपास की पहाड़ियों को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। यह प्रतिबंध लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया था।

​No Flying Zone में आते हैं सामरिक सैन्य और मिसाइल परीक्षण क्षेत्र05 / 07

​No Flying Zone में आते हैं सामरिक सैन्य और मिसाइल परीक्षण क्षेत्र

भारत में कुछ क्षेत्र जैसे कि सैन्य ठिकानों के पास और बंगाल की खाड़ी जैसे क्षेत्रों में मिसाइल परीक्षणों के दौरान, अस्थायी रूप से उड़ान निषिद्ध क्षेत्र नो-फ्लाई जोन बन जाते हैं। इन प्रतिबंधों की घोषणा NOTAM के माध्यम से की जाती है।

​नो-फ्लाई जोन में आगरा का ताजमहल भी06 / 07

​नो-फ्लाई जोन में आगरा का ताजमहल भी

उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित ताजमहल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है और दुनिया की सबसे मशहूर इमारतों में से एक मानी जाती है। इसलिए इसके ऊपर से किसी भी विमान को उड़ने की अनुमति नहीं है। बताते हैं कि विमानों के कंपन से होने वाली संरचनात्मक क्षति को रोकने, प्रदूषण कम करने के लिए इसके ऊपर से विमानों के उड़ने पर बैन है।

​नो-फ्लाई जोन में उड़ान भरने पर क्या होता है?07 / 07

​नो-फ्लाई जोन में उड़ान भरने पर क्या होता है?

भारत में नो-फ्लाई जोन में उड़ान भरना एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन माना जाता है। इसमें ड्रोन, हेलिकॉप्टर, विमान-सब शामिल होते हैं। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) तुरंत चेतावनी देता है। कई मामलों में भारतीय वायुसेना इंटरसेप्टर भेज सकती है (खातौर पर दिल्ली, रक्षा स्थलों, परमाणु क्षेत्रों आदि के पास) ड्रोन होने पर पुलिस/रक्षा कर्मी उसे जैम या काउंटर-ड्रोन सिस्टम से गिरा भी सकते हैं।

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