बिहार में SIR पर सियासी संग्राम, EC ने विज्ञापन के बाद भ्रम की स्थिति की साफ, कहा- निर्देशों में कोई बदलाव नहीं
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Jul 6, 2025, 07:18 PM IST
बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया गया कि यह प्रक्रिया निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार ही की जा रही है।
बिहार में SIR के निर्देशों में कोई बदलाव नहीं, EC ने कहा
EC in Special Intensive Revision: निर्वाचन आयोग ने रविवार को कहा कि बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य ( Special Intensive Revision- SIR) उसके आदेशानुसार किया जा रहा है और मसौदा सूची में उन मौजूदा मतदाताओं के नाम शामिल होंगे जिनके गणना फार्म प्राप्त हो गए हैं। निर्वाचन आयोग का यह बयान सोशल मीडिया पर बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में ‘बदलाव’ के बारे में पोस्ट के बीच आया है, जिस पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है।
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को बुलाया
चुनाव आयोग सूत्रों के मुताबिक, बिहार में मतदाता सूची के रिवीजन क्यों पड़ी जरूरत इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बयान आया है। उन्होंने कहा कि पिछले 4 महीनों में सभी 4123 ईआरओ, सभी 775 डीईओ और सभी 36 सीईओ ने, 28000 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ लगभग 5,000 बैठकें कीं। निर्वाचन आयोग ने भी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिलने के लिए बुलाया और उनसे मुलाकात का दौर भी जारी है। कोई भी राजनीतिक दल किसी न किसी वजह से मतदाता सूची से संतुष्ट नहीं था।
बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया जारी, अब तक 1.69 करोड़ प्रपत्र जमा
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है, जैसा कि कुछ अफवाहों में दावा किया जा रहा था।
- अब तक 1 करोड़ 69 लाख से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 21.46 प्रतिशत है।
- राज्य में 24 जून 2025 तक कुल 7 करोड़ 89 लाख 69 हजार 844 मतदाता पंजीकृत हैं।
- बीते 24 घंटे में 65 लाख से अधिक फॉर्म जमा हुए।
- फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई 2025 है।
- अब तक 7.25 प्रतिशत फॉर्म ऑनलाइन अपलोड किए जा चुके हैं।
जमीनी स्तर पर काम हुआ तेज
राज्य भर में 77,895 बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से फॉर्म भरवा रहे हैं और कुछ मामलों में उनकी लाइव तस्वीरें लेकर सीधे अपलोड भी कर रहे हैं। इससे मतदाताओं को फोटो खिंचवाने की अलग से जरूरत नहीं पड़ रही। इसके अलावा 20,603 अतिरिक्त बीएलओ भी नियुक्त किए जा रहे हैं ताकि काम समय पर और सुचारु रूप से पूरा हो सके। लगभग 4 लाख स्वयंसेवक जिनमें सरकारी कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस सदस्य आदि शामिल हैं। बुजुर्ग, दिव्यांग, बीमार और कमजोर वर्ग के मतदाताओं की मदद के लिए जुटे हुए हैं।
राजनीतिक दल भी हुए सक्रिय
SIR में विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 1,54,977 बूथ लेवल एजेंट भी पूरी सक्रियता से भाग ले रहे हैं। राज्य के 243 विधानसभा क्षेत्रों में 239 ईआरओ, 963 सहायक ईआरओ, 38 जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी लगातार इस प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। 1 अगस्त 2025 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया जाएगा। जिन मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त हो चुके हैं, उनके नाम इस सूची में शामिल होंगे। अगर किसी दस्तावेज की कमी पाई जाती है, तो दावा-आपत्ति के समय संबंधित अधिकारी उस दस्तावेज को प्राप्त कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते अपने फॉर्म भरकर जमा करें और यदि आवश्यक हो तो स्वयं ईसीआईनेट ऐप या पोर्टल पर जाकर उसे अपलोड भी करें।
SIR पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बयान
बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया गया कि यह प्रक्रिया निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार ही की जा रही है। सीईओ ने एक्स और फेसबुक पर जारी पोस्ट में कहा, महत्वपूर्ण सूचना - विशेष गहन पुनरीक्षण बिहार ( SIR) में निर्वाचन आयोग के 24 जून 2025 के आदेश के अनुसार सुचारु रूप से हो रहा है। उस आदेश के अनुसार, एक अगस्त 2025 को जारी किए जाने वाले मसौदा मतदाता सूची में उन मौजूदा मतदाताओं के नाम शामिल होंगे, जिनके गणना फॉर्म प्राप्त हो गए हैं।
सीईओ ने कहा, मौजूदा मतदाताओं को दस्तावेजीकरण पूरा करने में सुविधा प्रदान करने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। इन मौजूदा मतदाताओं को पहले अपने गणना फॉर्म जमा करने के बाद भी दस्तावेज जमा करने का समय मिलेगा। सभी गतिविधियां निर्वाचन आयोग के 24 जून 2025 के आदेश के अनुसार हैं। यह स्पष्टीकरण समाचार पत्रों में प्रकाशित निर्वाचन आयोग के एक विज्ञापन के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि जिनके पास अपेक्षित दस्तावेज नहीं हैं, वे संबंधित अधिकारियों को सिर्फ अपने गणना फार्म जमा करा सकते हैं।
चुनाव आयोग से फैसले का असर
इससे यह धारणा बनी कि निर्वाचन आयोग ने इस विशाल प्रक्रिया के कई विवादास्पद हिस्सों पर अपना कदम पीछे खींच लिया है, जो विपक्षी दलों के अनुसार, नागरिकता के लिए एक तरह से परीक्षा बन गई है। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस कथित बदलाव के बारे में कई पोस्ट किए। हालांकि, सीईओ ने अपने बयान में इनका कोई जिक्र नहीं किया। मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण बिहार मे किया जा रहा है जहां इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने है। इस प्रक्रिया का विपक्षी ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया गठबंधन) विरोध कर रहा है। गठबंधन के घटकों ने भी वामपंथी मजदूर संघों द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत नौ जुलाई को राज्य में इस मुद्दे को उठाने का निर्णय लिया है।
चुनाव आयोग ने लोगों से कुछ लोगों द्वारा दिए जा रहे बयानों से सावधान रहने का आग्रह किया, जो 24 जून 2025 के एसआईआर आदेश को पढ़े बिना अपने गलत और भ्रामक बयानों से जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं । यह स्पष्टीकरण कई सोशल मीडिया पोस्ट के मद्देनजर आया है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा एक समाचार पत्र में प्रकाशित चुनाव आयोग के विज्ञापन के बारे में दावा किया गया था कि अब सिर्फ फॉर्म भरने हैं। दस्तावेज जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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