Nitish kumar: आम चुनाव 2024 में अभी एक साल का समय बचा है। नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) की सत्ता को चुनौती देने के लिए सियासी समीकरणों को बनाने की कोशिश हो रही है। एनडीए के खिलाफ विपक्ष का साझा चेहरा कौन होगा इसे लेकर तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बड़ी बात कही। उनसे एक सवाल पूछा गया कि आप विपक्ष को गोलबंद क्यों कर रहे हैं। उस सवाल के जवाब में नीतीश कुमार ने कहा दरअसल बीजेपी देश के इतिहास को बदलने में जुटी है लिहाजा वो विपक्षी एकता(Opposition Party) की बात कर रहे हैं, उनको कोई पर्सनल एजेंडा नहीं है, यह लोगों की भलाई के लिए है। वो कभी भी अपने लिए कुछ नहीं करेंगे।
सहयोगी दल बदले, नीतीश कुमार बने रहे सीएम
अगर नीतीश कुमार के कार्यकाल की बात करें तो 2005 से लेकर आज की तारीख में वो बिहार के सीएम हैं। 2014-2015 के बीच वो कुछ समय के लिए जीतन राम मांझी को कमान दी थी। 2015 के चुनाव में उन्होंने आरजेडी के साथ सरकार बनाई। लेकिन मोहभंग होने के बाद वो फिर भी सीएम बने रहे हालांकि जिन मुद्दों को लेकर बीजेपी से ऐतराज था वो मुद्दे राजनीतिक हासिए पर चले गए थे। 2020 में जब बिहार विधानसभा का चुनाव हुआ तो नतीजों में उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर आई हालांकि बीजेपी की मदद से वो एक बार फिर सरकार बनाने में कामयाब रहे। लेकिन रिश्ता लंबा नहीं चल सका और 2022 में बीजेपी से तलाक हो गया। 2022 में ही उन्होंने फिर घटक दल के तौर पर आरजेडी का चुनाव किया और सीएम की कुर्सी पर काबिज हो गए।
क्या कहते हैं जानकार
जानकारों का कहना है कि इसमें दो मत नहीं कि नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दल एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि चेहरा कौन होगा। क्या सभी विपक्षी दल कांग्रेस को बड़े भाई के तौर पर स्वीकार करेंगे। क्या कांग्रेस के नेता किसी गैर कांग्रेसी चेहरे को पीएम के तौर पर स्वीकार करेंगे। दरअसल मूल सवाल तो यही है। कुछ समय के लिए मान लीजिए कि अगर विपक्ष के सभी दल एक जुट हो गए तो इस बात क्या गारंटी है कि पीएम की कुर्सी के सिरफुटौव्वल नहीं होगी। अब बात करते हैं नीतीश कुमार की। नीतीश कुमार का यह कहना कि उनकी कोई व्यक्तिगत ख्वाहिश नहीं है उसकी पोल वो खुद ब खुद खोल देते हैं। राजनीति में एक सिद्धांत है कि जो दिल में हो उसे कभी बाहर नहीं करो और जो जुबां पर हो उस पर सियासत होने दो।
