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खूब चर्चा में रहा निठारी कांड, बच्चों का मांस खाने-लाशों से सेक्स करने के लग थे आरोप, लोग कहते थे 'नरपिशाच'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 16, 2023, 03:19 PM IST

Nithari Kand: निठारी कांड देश में आग की तरह फैला। इसके बाद कई कहानियां सामने आईं। बताया गया कि मनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली लड़कियों को कोठी पर बुलाते थे, उनका रेप करते थे और लाश के टुकड़े करने के बाद उसे पास के नाले में फेंक देते थे। कई कहानियों में कहा गया कि मनिंदर सिंह पंढेर का नौकर सुरेंद्र कोली लड़कियों की हत्या के बाद लाश के साथ सेक्स करता था। उनके अंगों को पका कर खा जाता था।

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निठारी कांड के आरोपी मनिंदर पंढेर और सुरेंद्र कोली

Photo : BCCL

Nithari Kand: साल 2006 में नोएडा के निठारी कांड ने देश ही नहीं दुनिया को हिलाकर रख दिया था। यह कांड इतना भयावह था कि लोगों ने इसके दोनों आरोपियों को नरपिशाच कहना शुरू कर दिया। अखबारों की सुर्खियों से लेकर न्यूज चैनलों की हेडलाइन तक यह मामला कई दिनों तक बना रहा। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, ऐसी-ऐसी बातें निकलकर सामने आईं, जिन्होंने लोगों के रौंगटे खड़े कर दिए। नोएडा का यह निठारी कांड एक बार फिर से चर्चा में आ गया है।

दअरसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी कांड के दोनों आरोपियों सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर को सभी मामलों से बरी कर दिया है। दोनों को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे भी हाइकोर्ट ने रद्द कर दिया है। सुरेंद्र कोली को 12 मामलों में बरी किया गया है, जबकि मनिंदर सिंह पंढेर की 2 मामलों में फांसी की सजा को रद्द किया गया है। कोली और पंढेर पर मरे हुए बच्चों के मांस खाने और उनके शव के साथ सेक्स करने के आरोप लगे। हालांकि, कोर्ट अब कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है। पुलिस जांच के दौरान कई तरह की बातें सामने आईं। नाले से नरकंकालों को मिलने पर मीडिया में कई तरह की अटकलें लगीं। उस समय कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि पंढेर और कोली बच्चों के मांस खाते थे और उन्होंने शवों के साथ शारीरिक संबंध बनाए। पूरे मामले में काला जादू का एंगल भी सामने आया। उस समय निठारी कांड से जुड़े कुछ किस्से खूब सुर्खियों में रहे-

कोठी में गई लड़की, वापस नहीं आई

बात 7 मई 2006 की है। नोएडा के निठारी गांव में मनिंदर सिंह पंढेर की कोठी नंबर D-5 के सामने एक रिक्शा रुकता है। रिक्शे से पायल नाम की लड़की उतरती है और रिक्शे वाले से वापस आकर पैसे देने की बात करती है। काफी देर बाद भी जब लड़की वापस नहीं आती तो रिक्शे वाला कोठी का गेट खटखटाता है। मनिंदर सिंह पंढेर का नौकर सुरेंद्र कोली दरवाजा खोलता है और पायल के काफी देर पहले यहां से चले जाने की बात कहता है। हालांकि, रिक्शे वालो को कोली की बात पर शक होता है और वह पायल के गायब होने की खबर उसके घरवालों के पास पहुंचा देता है। पायल के पिता नंदलाल अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं और यहीं से पुलिस की जांच शुरू होती है।

नाले से मिलना शुरू हुए नरकंकाल

पुलिस पायल को तलाशते हुए मनिंदर सिंह पंढेर की कोठी तक पहुंचती है। पूछताछ शुरू होती है तो दोनों आरोपी पायल के रेप और हत्या की बात कबूल लेते हैं। इसके साथ ही वे यह भी बताते हैं कि उन्होंने पायल की लाश पास के नाले में फेंक दी है। दोनों की निशानदेही पर जब पुलिस नाले की सफाई शुरू कराती है, तो उससे एक के बाद एक बड़ी संख्या में नरकंकाल निकलना शुरू होते हैं। इसके बाद नोएडा के आसपास के गांवों की एक दर्जन लड़कियों के गायब होने के मामलों का खुलासा शुरू हो गया।

देश भर में फैलने लगी नरपिशाच की कहानी

निठारी कांड देश में आग की तरह फैला। इसके बाद कई कहानियां सामने आईं। बताया गया कि मनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली लड़कियों को कोठी पर बुलाते थे, उनका रेप करते थे और लाश के टुकड़े करने के बाद उसे पास के नाले में फेंक देते थे। कई कहानियों में कहा गया कि मनिंदर सिंह पंढेर का नौकर सुरेंद्र कोली लड़कियों की हत्या के बाद लाश के साथ सेक्स करता था। उनके अंगों को पका कर खा जाता था। यहां तक कि मनिंदर सिंह पंढेर पर मानव अंगों की तस्करी का भी आरोप लगा।

सीबीआई ने दर्ज किए 16 मामले

बता दें, सीबीआई ने इस मामले में जांच करते हुए सुरेंद्र कोली के खिलाफ 16 मामले दर्ज किए थे। इसमें से उसे 14 मामलों में फांसी की सजा मिले चुकी है। वहीं मनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ 6 मामले दर्ज किए गए थे। इसमें 3 मामलों में उसे फांसी की सजा सुनाई गई थी। एक मामले में सजा पहले की रद्द की जा चुकी है। जबकि पंढेर के खिलाफ बचे दो मामलों में उसे बरी किया गया है। वहीं कोली को 12 मामलों से बरी किया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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