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निठारी कांड के दोनों आरोपियों की फांसी की सजा रद्द, कोर्ट ने किया बरी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 16, 2023, 11:45 AM IST

Nithari Kand: इलाहाबाद कोर्ट ने निठारी कांड के दोनों आरोपियों सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर की फांसी की सजा रद्द कर दी है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों को निर्दोष करार दिया गया है।

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निठारी कांड का आरोपी सुरेंद्र कोली

Photo : PTI

Nithari Kand: नोएडा के चर्चित निठारी कांड के दोनों आरोपियों सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद कोर्ट ने दोनों की फांसी की सजा रद्द कर दी है और सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों को निर्दोष करार दिया गया है।

अदालत ने सुरेंद्र कोली को उसके खिलाफ दर्ज किए गए 12 मामलों में निर्दोष पाया है। जबकि, मनिंदर सिंह पंढेर को उसके खिलाफ दर्ज दो मामलों में निर्दोष पाया है।

इस आधार पर किया बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी कांड के दोनों दोषियों को सबूतों और गवाहों के अभाव में बरी किया है। बता दें, सुरेंद्र कोली ने 12 मामलों में मिली फांसी की सजा के खिलाफ अपील दाखिल की थी, जबकि मनिंदर सिंह पंढेर ने दो मामलों में फांसी की सजा के खिलाफ अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, रिंपा हलदर मर्डर केस में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा को बरकरार रखा था।

क्या है निठारी कांड

2005-2006 में सामने आए निठारी कांड ने देश ही नहीं दुनिया को भी हिलाकर रख दिया था। यह भारतीय इतिहास में सबसे कुख्यात आपराधिक जांचों में से एक मामला है। दरअसल, दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी में बिजनेसमैन मनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पास नाले में मानव कंकाल मिले थे। इसके बाद पुलिस जांच शुरू हुई तो कई बच्चों के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की बातें खुलकर सामने आईं। सीबीआई ने इस मामले में कुल 16 केस दर्ज किए थे। इन सभी मामलों में मनिंदर सिंह पंढेर के नौकर सुरेंद्र कोली पर हत्या, अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगाया गया। यहां तक कि यह भी सामने आया कि हत्या के बाद सबूत मिटाने का काम कोली ही करता था। वहीं मनिंदर सिंह पंढेर पर एक मामले में मानव अंगों की अनैतिक तस्करी का भी आरोप लगाया गया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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